लोकसभा में निजी कंपनियों के लिए परमाणु क्षेत्र खोलने वाले विधेयक पर चर्चा

**EDS: THIRD PARTY IMAGE, SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: Lok Sabha Speaker Om Birla conducts the proceedings in the House during the Winter session of Parliament, in New Delhi, Monday, Dec. 15, 2025. (Sansad TV via PTI Photo) (PTI12_15_2025_000076B)

नई दिल्ली, 17 दिसंबर (पीटीआई) लोकसभा ने बुधवार को परमाणु ऊर्जा बिल पर चर्चा शुरू की, जिसमें केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह भारत को 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगा, जबकि विपक्ष ने मसौदा विधेयक की कुछ धाराओं में संशोधन पर सवाल उठाए।

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री सिंह ने स्थायी परमाणु ऊर्जा विकास और संवर्धन विधेयक (SHANTI बिल) प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य सख्त नियंत्रण वाले नागरिक परमाणु क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को खोलना है।

सिंह ने इस बिल को “मील का पत्थर” बताते हुए कहा कि यह देश के विकासात्मक सफर को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा, “भारत की भू-राजनीतिक भूमिका बढ़ रही है। अगर हमें वैश्विक खिलाड़ी बनना है, तो हमें वैश्विक मानकों और रणनीतियों का पालन करना होगा। दुनिया स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है। हमने भी 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य तय किया है।”

उन्होंने कहा कि बिल भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा का हिस्सा 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए जरूरी है। इसके अलावा, परमाणु ऊर्जा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय 2027 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विपक्षी कांग्रेस के सदस्य मनीष तिवारी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि यदि परमाणु उपकरण आपूर्तिकर्ताओं पर दायित्व हटाने वाली धारा को हटाया गया, तो यह भारत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। उन्होंने 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम और 2010 के नागरिक परमाणु हानि अधिनियम को बिल में रद्द करने के प्रावधानों का भी विरोध किया।

तिवारी ने कहा, “आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी पर बिल में कोई शब्द नहीं है। अगर परमाणु क्षेत्र खुलता है, तो विदेशी आपूर्तिकर्ताओं की उपस्थिति बढ़ जाएगी। आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी की धारा को हटाना भारत के लिए कैसे फायदेमंद होगा?”

उन्होंने कहा कि बिल परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को वैधानिक अधिकार देता है, लेकिन परमाणु क्षेत्र नियामक को स्वायत्तता नहीं देता। उन्होंने कहा कि हमें एक तटस्थ नियामक की आवश्यकता है।

तिवारी ने याद दिलाया कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना की थी, और 1974 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पहले परमाणु परीक्षण किए। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में दूसरे परमाणु परीक्षण का आदेश दिया, और उनके उत्तराधिकारी मनमोहन सिंह ने भारत को परमाणु अलगाववाद से बाहर निकाला।

तिवारी ने कहा कि बिल रेडियोधर्मी अपशिष्ट प्रबंधन का कोई ढांचा नहीं देता और यह यूरेनियम आधारित रिएक्टर को प्राथमिकता देता है, जबकि थोरियम और मोल्टेन सॉल्ट रिएक्टर को नजरअंदाज करता है।

कांग्रेस सदस्य ने मांग की कि बिल को पारित होने से पहले सावधानीपूर्वक जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति को भेजा जाए।

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