उच्च AQI और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध साबित करने वाला कोई निर्णायक डेटा नहीं: सरकार

Kirti Vardhan Singh

नई दिल्ली, 19 दिसंबर (पीटीआई) सरकार ने संसद को बताया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के उच्च स्तर और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधे संबंध को स्थापित करने वाला कोई निर्णायक डेटा उपलब्ध नहीं है। हालांकि, उसने यह स्वीकार किया कि वायु प्रदूषण श्वसन संबंधी रोगों और उनसे जुड़ी बीमारियों को बढ़ाने वाले कारकों में से एक है।

पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। वह भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी के प्रश्न का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने पूछा था कि क्या सरकार इस बात से अवगत है कि अध्ययनों और चिकित्सकीय परीक्षणों में यह सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर में लंबे समय तक खतरनाक AQI स्तरों के संपर्क में रहने से फेफड़ों में फाइब्रोसिस हो रहा है, जिससे फेफड़ों की क्षमता में अपूरणीय कमी आती है।

बाजपेयी ने यह भी जानना चाहा था कि क्या दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों में फेफड़ों की लचीलापन क्षमता अच्छे AQI वाले शहरों में रहने वाले लोगों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई है। इसके अलावा उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार के पास दिल्ली-एनसीआर के लाखों निवासियों को पल्मोनरी फाइब्रोसिस, सीओपीडी, एम्फायसीमा, फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी और लगातार घटती फेफड़ों की लचीलापन क्षमता जैसी घातक बीमारियों से बचाने के लिए कोई समाधान है।

अपने उत्तर में मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण के क्षेत्र में कार्यक्रम प्रबंधकों, चिकित्सा अधिकारियों और नर्सों, नोडल अधिकारियों, सेंटिनल साइट्स, आशा जैसे फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं, महिलाओं और बच्चों जैसे संवेदनशील समूहों तथा ट्रैफिक पुलिस और नगर निकाय कर्मियों जैसे व्यावसायिक रूप से प्रभावित समूहों के लिए समर्पित प्रशिक्षण मॉड्यूल विकसित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों को लेकर सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में तैयार की गई है। राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनपीसीसीएचएच) के तहत भी विभिन्न संवेदनशील समूहों के लिए अनुकूलित आईईसी सामग्री विकसित की गई है।

मंत्री ने बताया कि वायु प्रदूषण के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और अलर्ट, साथ ही वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान, भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा राज्यों और शहरों को उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र और समुदाय, विशेषकर संवेदनशील आबादी, पहले से तैयारी कर सकें।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उद्देश्य तरलीकृत पेट्रोलियम गैस के रूप में स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराकर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। इसके अलावा, सरकार का स्वच्छ भारत मिशन शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, रास्तों और बुनियादी ढांचे की सफाई पर केंद्रित है, और “स्वच्छ हवा” इस मिशन का एक अहम हिस्सा है।

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