राहुल गांधी ने G RAM G विधेयक को बताया ‘राज्य-विरोधी’; मनरेगा में बदलाव के खिलाफ संघर्ष का ऐलान

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image recieved on Dec. 14, 2025, LoP in the Lok Sabha and Congress leader Rahul Gandhi, left, with party MP Sonia Gandhi during the 'Vote Chor, Gaddi Chhod' rally, at Ramlila Maidan in New Delhi, Sunday, Dec. 14, 2025. (AICC via PTI Photo)(PTI12_14_2025_000393B)

नई दिल्ली, 19 दिसंबर (पीटीआई) — कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को मोदी सरकार पर एक ही दिन में मनरेगा के 20 साल बर्बाद करने का आरोप लगाया और नए VB-G RAM G कानून को “गांव-विरोधी” करार दिया।

उन्होंने कहा कि VB-G RAM G विधेयक मनरेगा का कोई “सुधार” नहीं है। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए गांधी ने कहा, “कल रात मोदी सरकार ने एक ही दिन में मनरेगा के बीस साल ध्वस्त कर दिए। यह अधिकार आधारित, मांग पर आधारित रोजगार गारंटी को खत्म कर इसे दिल्ली से नियंत्रित, सीमित योजना में बदल देता है। यह अपने स्वरूप में ही राज्य-विरोधी और गांव-विरोधी है।”

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण मजदूरों को मोलभाव की ताकत दी थी। उन्होंने आरोप लगाया, “वास्तविक विकल्प मिलने से शोषण और मजबूरी में पलायन कम हुआ, मजदूरी बढ़ी, काम की परिस्थितियां सुधरीं और ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण व पुनर्जीवन हुआ। यही ताकत इस सरकार को तोड़नी है।”

गांधी ने कहा कि काम की सीमा तय कर और उसे नकारने के नए रास्ते बनाकर VB-G RAM G विधेयक ग्रामीण गरीबों के पास मौजूद एकमात्र मजबूत साधन को कमजोर करता है। उन्होंने कहा, “कोविड के दौरान हमने देखा कि मनरेगा का क्या महत्व था। जब अर्थव्यवस्था ठप हो गई और आजीविकाएं खत्म हो गईं, तब इस योजना ने करोड़ों लोगों को भूख और कर्ज में गिरने से बचाया।”

उन्होंने दावा किया कि इस योजना से महिलाओं को सबसे अधिक लाभ मिला, क्योंकि हर साल महिलाओं का योगदान कुल कार्यदिवसों का आधे से अधिक रहा है। गांधी ने कहा, “जब किसी रोजगार योजना को सीमित किया जाता है, तो सबसे पहले महिलाएं, दलित, आदिवासी, भूमिहीन मजदूर और सबसे गरीब ओबीसी समुदाय बाहर हो जाते हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून को बिना उचित जांच-पड़ताल के संसद से जबरन पारित कराया गया। “विपक्ष की मांग थी कि विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजा जाए, लेकिन इसे खारिज कर दिया गया। जो कानून ग्रामीण सामाजिक अनुबंध को नए सिरे से गढ़ता है और करोड़ों मजदूरों को प्रभावित करता है, उसे बिना गंभीर समिति जांच, विशेषज्ञ परामर्श और जनसुनवाई के कभी पारित नहीं किया जाना चाहिए,” उन्होंने कहा।

गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के लक्ष्य स्पष्ट हैं — मजदूरों को कमजोर करना, ग्रामीण भारत की सौदेबाजी की ताकत को तोड़ना, खासकर दलितों, ओबीसी और आदिवासियों की, सत्ता का केंद्रीकरण करना और फिर इसे सुधार के नाम पर पेश करना।”

मनरेगा को दुनिया के सबसे सफल गरीबी उन्मूलन और सशक्तिकरण कार्यक्रमों में से एक बताते हुए उन्होंने कहा, “हम इस सरकार को ग्रामीण गरीबों की आखिरी रक्षा पंक्ति को नष्ट नहीं करने देंगे। हम मजदूरों, पंचायतों और राज्यों के साथ खड़े रहेंगे, इस कदम को परास्त करेंगे और इसे वापस लेने के लिए देशव्यापी मोर्चा बनाएंगे।”

उल्लेखनीय है कि संसद ने गुरुवार रात तीव्र विपक्षी विरोध के बीच VB-G RAM G विधेयक पारित किया, जो 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेने और हर साल 125 दिनों के ग्रामीण रोजगार की गारंटी देने का दावा करता है। विकासित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिलने के कुछ घंटों बाद राज्यसभा ने भी ध्वनिमत से पारित कर दिया। विपक्ष ने महात्मा गांधी का नाम हटाने और राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का आरोप लगाते हुए इसका कड़ा विरोध किया। पीटीआई SKC ARI

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