बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने लोगों से हर तरह की भीड़ हिंसा का विरोध करने की अपील की

**EDS: SCREENGRAB VIA PTI VIDEOS** Dhaka: People stand inside damaged premises of Bangladesh’s founding father Sheikh Mujibur Rahman’s home after it was vandalised by protesters following the death of Sharif Osman Hadi, at 32 Dhanmandi, in Dhaka, Friday, Dec. 19, 2025. Hadi, a prominent leader of the July Uprising who was shot last week, died while undergoing treatment at a Singapore hospital after fighting for his life for six days. (Handout via PTI Photo) (PTI12_19_2025_000093B)

ढाका, 19 दिसंबर (पीटीआई): बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शुक्रवार को नागरिकों से “कुछ हाशिये के तत्वों” द्वारा की जा रही हर प्रकार की भीड़ हिंसा का विरोध करने की अपील की। यह अपील जुलाई विद्रोह के एक प्रमुख नेता की राजधानी में नकाबपोश हमलावरों द्वारा गोली मारे जाने के छह दिन बाद मौत के मद्देनज़र की गई है।

मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने एक बयान में एक हिंदू व्यक्ति की लिंचिंग की भी निंदा की और कहा कि नए बांग्लादेश में इस तरह की हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। बयान में कहा गया, “इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

बांग्ला ट्रिब्यून समाचार पोर्टल के अनुसार, दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू व्यक्ति की गुरुवार को मयमनसिंह शहर में कथित ईशनिंदा के आरोप में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और बाद में उसके शव को आग लगा दी गई।

मुख्य सलाहकार के प्रेस विंग की ओर से जारी बयान में कहा गया, “हम हिंसा, धमकी, आगजनी और संपत्ति के विनाश की सभी घटनाओं की कड़े शब्दों में और बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं।”

बयान में कहा गया, “इस निर्णायक घड़ी में हम हर नागरिक से अपील करते हैं कि वे हादी को सम्मान देते हुए हिंसा, उकसावे और नफरत को अस्वीकार करें और उसका प्रतिरोध करें।”

हालांकि दिन में किसी हिंसा की सूचना नहीं मिली, लेकिन गुरुवार रात प्रदर्शनकारियों ने ढाका के धानमंडी 32 में स्थित बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान के पहले से ध्वस्त घर के ढांचे में तोड़फोड़ की और राजधानी में दो प्रमुख मीडिया संस्थानों के दफ्तरों पर हमला किया।

प्रदर्शनकारियों ने चटगांव में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के आवास पर भी ईंट-पत्थर फेंके, हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया और 12 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

बयान में कहा गया, “यह हमारे राष्ट्र के इतिहास का एक निर्णायक क्षण है, जब हम एक ऐतिहासिक लोकतांत्रिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। हम अराजकता में पनपने वालों और शांति को ठुकराने वालों को इसे पटरी से उतरने की अनुमति नहीं दे सकते।”

सरकार ने गुरुवार रात मीडिया संस्थानों पर हुए हमलों की भी निंदा की और कहा कि मीडिया पर हमला “स्वतंत्र प्रेस पर हमला” के समान है। बयान में कहा गया कि इस घटना ने देश की लोकतांत्रिक प्रगति और स्वतंत्र पत्रकारिता के मार्ग में एक बड़ी बाधा उत्पन्न की है।

बयान में कहा गया, “डेली स्टार, प्रोथोम आलो और न्यू एज के पत्रकारों से हम कहना चाहते हैं कि हम आपके साथ खड़े हैं। आपने जो आतंक और हिंसा झेली है, उसके लिए हमें गहरा खेद है। देश ने आतंक के सामने आपके साहस और संयम को देखा है। पत्रकारों पर हमले सच्चाई पर हमले हैं। हम आपको पूर्ण न्याय का भरोसा दिलाते हैं।”

सरकार ने कहा कि आगामी चुनाव और जनमत संग्रह केवल राजनीतिक प्रक्रियाएं नहीं हैं, बल्कि “एक गंभीर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता” हैं। फरवरी 12 को होने वाले आम चुनावों के उम्मीदवार हादी की सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान छह दिन तक जीवन से संघर्ष करने के बाद मौत हो गई। हादी पिछले वर्ष हुए विरोध प्रदर्शनों — जिन्हें ‘जुलाई विद्रोह’ कहा गया — के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जिनके चलते शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी।

शेख हसीना, जो पिछले वर्ष अगस्त में सत्ता से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश छोड़कर चली गई थीं, वर्तमान में भारत में हैं। पीटीआई जेडएच जेडएच जेडएच

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