
वॉशिंगटन, 23 दिसंबर (एपी) — एक संघीय न्यायाधीश ने सोमवार को फैसला दिया कि ट्रंप प्रशासन को एल साल्वाडोर की कुख्यात जेल में भेजे गए वेनेजुएला के प्रवासियों को कानूनी प्रक्रिया का अधिकार देना होगा—या तो उन्हें अदालत में सुनवाई का अवसर दिया जाए या फिर उन्हें अमेरिका वापस लाया जाए।
अमेरिकी जिला न्यायाधीश जेम्स बोसबर्ग ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर इन लोगों के लिए एक योजना पेश करने का आदेश दिया। ये वे पुरुष हैं जिन्हें बाद में कैदियों की अदला-बदली के तहत वेनेजुएला वापस भेज दिया गया था।
बोसबर्ग ने लिखा, “वादियों को जिस तरीके से हटाया गया, वह नहीं होना चाहिए था—लगभग बिना किसी सूचना और हटाए जाने के आधार को चुनौती देने के किसी अवसर के बिना—जो उनकी उचित प्रक्रिया (ड्यू प्रोसेस) के अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।”
यह मामला प्रशासन की व्यापक आव्रजन कार्रवाई में एक कानूनी टकराव का केंद्र बना हुआ है। इसकी शुरुआत मार्च में हुई, जब ट्रंप ने 18वीं सदी के एक युद्धकालीन कानून का इस्तेमाल करते हुए कथित गिरोह सदस्यों के रूप में आरोपित वेनेजुएला के प्रवासियों को एक विशाल जेल—टेररिज़्म कन्फाइनमेंट सेंटर (CECOT)—भेजा।
दो विमानों में सवार पुरुषों को उस जेल में ले जाया गया, जबकि बोसबर्ग ने मौखिक आदेश देकर विमानों को वापस मोड़ने को कहा था। इसके बाद बोसबर्ग ने अवमानना की जांच शुरू की, हालांकि न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच यह तीखा टकराव अपीलीय अदालत द्वारा फिलहाल रोक दिया गया है।
प्रशासन ने उनके आदेश के उल्लंघन से इनकार किया है। व्हाइट हाउस की ओर से सोमवार के फैसले पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।
जुलाई में अमेरिका के साथ कैदियों की अदला-बदली के तहत 200 से अधिक प्रवासियों को वेनेजुएला वापस भेज दिया गया था।
डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा संघीय पीठ पर नियुक्त बोसबर्ग का यह फैसला उन्हें इस आरोप को चुनौती देने का रास्ता खोलता है कि वे ‘ट्रेन दे अरागुआ’ गिरोह के सदस्य हैं और ‘एलियन एनिमीज़ एक्ट’ के तहत हटाए जाने के पात्र हैं।
एसीएलयू के वकील ली गेलरेंट, जो प्रवासियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, ने कहा, “यह महत्वपूर्ण फैसला स्पष्ट करता है कि ट्रंप प्रशासन बिना किसी उचित प्रक्रिया के लोगों को एक कुख्यात विदेशी जेल में गुपचुप भेजकर यूँ ही नहीं बच सकता। इसके परिणाम होंगे।” (एपी) AMJ AMJ
