चंडीगढ़, 22 दिसंबर (PTI) — हरियाणा विधानसभा ने सोमवार को एक विधेयक पारित किया, जिसके तहत दुकानों और निजी वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों के दैनिक कार्य समय को नौ घंटे से बढ़ाकर दस घंटे किया गया, जबकि साप्ताहिक 48 घंटे की सीमा बनी रहेगी।
हरियाणा शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टेब्लिशमेंट्स (संशोधन) विधेयक, 2025, 1958 के अधिनियम में संशोधन करने का प्रयास करता है। श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि ये बदलाव छोटे प्रतिष्ठानों पर अनुपालन बोझ कम करने, आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और पीक डिमांड के समय लचीलापन देने के लिए किए गए हैं, साथ ही कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
हालांकि, कांग्रेस ने इस विधेयक की कड़ी आलोचना की। पार्टी के विधायक आदित्य सूरजवाला ने सवाल उठाया कि क्या यह कदम व्यवसाय में आसानी के लिए है या “आधुनिक युग में दासता को वैध बनाने” के लिए। उन्होंने इस बात पर ध्यान दिलाया कि विधेयक में ओवरटाइम की अनुमति को 50 घंटे से बढ़ाकर 156 घंटे प्रति तिमाही किया गया है और लगातार काम करने का समय बिना विश्राम के पांच घंटे से बढ़ाकर छह घंटे कर दिया गया है।
“दस घंटे का दैनिक कार्य और दो घंटे का ओवरटाइम। अगर कोई व्यक्ति छह दिन में 12 घंटे काम करता है, तो परिवार के लिए समय कब मिलेगा?” सूरजवाला ने पूछा। उनके द्वारा पेश किए गए नौ घंटे के कार्यदिवस को बनाए रखने के संशोधन को आवाज़ मतदान द्वारा खारिज कर दिया गया।
विज ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि 10 घंटे का कार्यदिवस महाराष्ट्र, पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में पहले से लागू है। उन्होंने यह भी कहा कि 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को अब पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होगी और केवल अधिकारियों को सूचना देना होगा, जिससे रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा और छोटे व्यापारियों पर नियामक दबाव कम होगा।
सूरजवाला ने जवाब में कहा कि 80 प्रतिशत से अधिक दुकानें 20 से कम कर्मचारियों को रोजगार देती हैं और वे अधिनियम की प्रावधानों से प्रभावी रूप से बाहर आ जाएंगी।
यह विधेयक हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन पारित किए गए आठ कानूनों में शामिल था।
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