
नई दिल्ली, 26 दिसंबर (पीटीआई) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संथाली भाषा में संविधान के विमोचन को “प्रशंसनीय प्रयास” बताते हुए कहा कि इससे संवैधानिक जागरूकता और लोकतांत्रिक सहभागिता को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश को संथाली संस्कृति पर गर्व है और राष्ट्रीय प्रगति में संथाली समाज के योगदान को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
“एक प्रशंसनीय प्रयास! संथाली भाषा में संविधान से संवैधानिक जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा,” मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुरुवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में भारत के संविधान का संथाली भाषा में संस्करण जारी किया।
संथाली भाषा को वर्ष 2003 में 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। यह भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है।
यह भाषा झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय द्वारा बोली जाती है।
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