
नई दिल्ली, 26 दिसंबर (पीटीआई) — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में बहादुरी, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियों के लिए 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार प्रदान किए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेता बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि इन बच्चों ने अपने परिवार, समाज और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान देशभर के बच्चों को प्रेरित करेगा और यह पुरस्कार उनके उत्साहवर्धन के लिए प्रदान किया गया है।
वीर बाल दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 320 वर्ष पूर्व, दसवें सिख गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चारों पुत्रों ने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिए थे। उन्होंने कहा कि सबसे छोटे साहिबज़ादे—बाबा ज़ोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—की वीरता का सम्मान भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी किया जाता है। राष्ट्रपति ने सत्य और न्याय के लिए गर्व के साथ अपने प्राण न्योछावर करने वाले बाल वीरों को श्रद्धापूर्वक याद किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश की महानता तब सुनिश्चित होती है जब उसके बच्चे देशभक्ति और उच्च आदर्शों से परिपूर्ण हों। उन्होंने खुशी जताई कि ये बच्चे बहादुरी, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सामाजिक सेवा और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रज्ञिका जैसे प्रतिभाशाली बच्चों की वजह से ही भारत को वैश्विक मंच पर शतरंज की महाशक्ति माना जाता है। उन्होंने अजय राज और मोहम्मद सिदान पी की भी सराहना की, जिन्होंने अपनी सूझबूझ और साहस से दूसरों की जान बचाई। राष्ट्रपति ने व्योमा प्रिया और कामलेश कुमार का भी उल्लेख किया, जिन्होंने दूसरों की जान बचाते हुए अपने प्राण गंवाए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान युद्ध जैसे हालात में दस वर्षीय श्रवण सिंह ने अपने घर के पास सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों को नियमित रूप से पानी, दूध और लस्सी पहुंचाई। वहीं, दिव्यांग शिवानी होसुरु उप्पारा ने आर्थिक और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल जगत में असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने क्रिकेट के क्षेत्र में वैभव सूर्यवंशी के रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन का भी उल्लेख किया।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि ऐसे साहसी और प्रतिभाशाली बच्चे आगे भी उत्कृष्ट कार्य करते रहेंगे और भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने अपने संबोधन में कहा कि पुरस्कार पाने वाले बच्चों ने यह सिद्ध कर दिया है कि आत्मविश्वास और समर्पण से संसाधनों की कमी को भी मात दी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 प्रतिभाशाली बच्चों को सम्मानित किया गया है, जो देश के विभिन्न हिस्सों से आए हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रयास अनगिनत बच्चों को सपने देखने, संघर्ष करने और सार्थक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष बच्चों को प्रदान किया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है, जो बहादुरी, कला एवं संस्कृति, पर्यावरण, सामाजिक सेवा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। वर्ष 2025 में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 बच्चों को इस सम्मान के लिए चुना गया है। पीटीआई
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