जालना, 28 दिसंबर (पीटीआई) इस्लामिक संगठन रज़ा अकादमी ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा को रोकने में कथित विफलता को लेकर वहां की सरकार की कड़ी निंदा की है और सुझाव दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर भारत को अपने पड़ोसी देश के साथ कूटनीतिक संबंध तोड़ने पर भी विचार करना चाहिए।
मुंबई स्थित रज़ा अकादमी के अध्यक्ष मोहम्मद सईद नूरी ने रविवार को जालना में पत्रकारों से कहा कि बांग्लादेश में धार्मिक समुदायों के खिलाफ लिंचिंग और भीड़ द्वारा हमलों की घटनाएं बेहद निंदनीय हैं।
उन्होंने मांग की कि भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर सख्त रुख अपनाए और यदि बांग्लादेश सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहती है तो द्विपक्षीय संबंध समाप्त करने पर भी विचार किया जाए।
नूरी, जो ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा के उपाध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि रज़ा अकादमी मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के साथ मिलकर बांग्लादेश दूतावास के बाहर प्रदर्शन करेगी और वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग करेगी।
उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यकों की रक्षा करना हर देश का कर्तव्य है,” और जोड़ा कि “ऐसी हिंसा के सामने चुप्पी साधना भी मिलीभगत के समान है।”
नूरी जालना में सूफी संत सेर सावर के 748वें वार्षिक उर्स में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा कि सूफी संतों की शिक्षाएं प्रेम, भाईचारे और शांति का संदेश देती हैं तथा सभी इंसानों की समानता पर जोर देती हैं।
उन्होंने कहा, “एक इंसान की हत्या को पूरी मानवता की हत्या के समान माना गया है।”
पीटीआई सीओआर एनआर
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