गोलियों की आवाज़ से अफ्रीका कप तक: उम्मीद जगाने के लिए भीषण युद्ध झेलते सूडानी फुटबॉल खिलाड़ी

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कासाब्लांका (मोरक्को), 28 दिसंबर (एपी) जब सूडान के खिलाड़ी अम्मार तैफूर ने पहली बार अपने होटल के कमरे के बाहर गोलियों की आवाज़ सुनी, तो उन्होंने इसे नजरअंदाज किया और फिर से सो गए। उन्हें एक फुटबॉल मैच खेलना था।

लेकिन कुछ घंटों बाद फिर से गोलीबारी शुरू हो गई और मध्य सूडान के ओमदुरमान में हथियारबंद लोगों ने इलाके पर कब्ज़ा करने की कोशिश करते हुए होटल को घेर लिया। 28 वर्षीय अमेरिकी-सूडानी मिडफील्डर तैफूर को तब यह अहसास नहीं था कि ये गोलियां एक ऐसे भीषण युद्ध की शुरुआत हैं, जिसमें बाद में हजारों लोगों की जान जाएगी और लाखों लोग विस्थापित होंगे।

अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के दौरान इस हफ्ते एसोसिएटेड प्रेस से बात करते हुए तैफूर ने कहा, “हमने होटल की खिड़कियों से देखा कि चारों ओर लोग हथियार लिए हुए थे। वे सेना के विमानों पर गोलियां चला रहे थे। यह पूरी तरह अप्रत्याशित था।”

तैफूर, उनके साथी खिलाड़ी, कोच और मेडिकल स्टाफ दो दिनों से अधिक समय तक होटल में फंसे रहे। इस दौरान भोजन और पानी की कमी होने लगी। हथियारबंद लोगों के हटने के बाद ही वे बाहर निकल पाए। इसके बाद तैफूर अमेरिका लौट गए और सूडान में अपना करियर पीछे छोड़ते हुए नई टीम की तलाश शुरू की।

उनका अनुभव उन कई सूडानी खिलाड़ियों जैसा है, जिन्हें युद्ध के कारण देश छोड़ना पड़ा, जबकि उनके परिवार युद्धग्रस्त अफ्रीकी देश में ही रह गए। इसके बावजूद वे शीर्ष स्तर पर फुटबॉल करियर जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।

भीषण युद्ध

सूडान में चल रहे युद्ध को संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया का सबसे गंभीर मानवीय संकट करार दिया है। अप्रैल 2023 में सेना और शक्तिशाली अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच सत्ता संघर्ष खुली लड़ाई में बदल गया। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर हत्याएं, बलात्कार और जातीय हिंसा शुरू हो गई।

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस संघर्ष में 40,000 से अधिक लोग मारे गए हैं, हालांकि राहत एजेंसियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं और देश के कई हिस्सों में बीमारियां और अकाल फैल रहे हैं।

फिर भी आगे बढ़ती टीम

इसके बावजूद सूडान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम, जिसे ‘फाल्कन्स ऑफ जेदियाने’ कहा जाता है, ने हार नहीं मानी। टीम ने सभी क्वालिफाइंग मुकाबले विदेश में खेलते और अभ्यास करते हुए अफ्रीका कप के लिए क्वालिफाई किया। सूडान ने घाना को हराकर अफ्रीकी फुटबॉल की इस दिग्गज टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया।

उम्मीद का प्रतीक

कई सूडानी नागरिकों के लिए यह टीम उम्मीद, एकता और युद्ध की कठिनाइयों से थोड़ी राहत का प्रतीक बन गई है। मोरक्को की राजधानी रबात में अल्जीरिया के खिलाफ पहले मैच से पहले सूडानी समर्थकों ने राष्ट्रीय झंडे लहराए, गाड़ियों के हॉर्न बजाए और “सूडान! सूडान!” के नारे लगाते हुए जश्न मनाया।

राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी मोहम्मद अबुआगला ने एपी से कहा, “युद्ध ने देश के कई हिस्सों को तबाह कर दिया है और बहुत से निर्दोष लोग मारे गए हैं। जब हम खेलते हैं और जीतते हैं, तो इससे हमारे देश के लोगों को खुशी मिलती है। हम उनकी मुश्किलों के बावजूद उनके चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश कर रहे हैं।”

खिलाड़ियों को खुद भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। युद्ध के कारण घरेलू लीग स्थगित हो गई, जिससे खिलाड़ियों को विदेशों में—अक्सर पड़ोसी लीबिया में—खेलना पड़ा।

सूडान के दो सबसे बड़े क्लब अल-मेरिख और अल-हिलाल अब रवांडा की लीग में खेल रहे हैं। इससे पहले वे मॉरिटानिया की लीग में खेलते थे, जिसे अल-हिलाल ने जीता भी था। पिछले साल सूडान फुटबॉल संघ ने ‘एलीट लीग’ नाम से आठ टीमों की एक प्रतियोगिता कराई, जो एक महीने से भी कम समय चली।

अबुआगला ने युद्ध के दौरान अपने चाचा को खो दिया। उन्होंने कहा, “वह बीमार थे, लेकिन हम उन्हें अस्पताल नहीं ले जा सके क्योंकि लड़ाई के कारण सभी अस्पताल बुरी तरह प्रभावित हो चुके थे,” यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।

दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि युद्ध ही उन्हें मैदान पर और अधिक प्रेरित करता है। वे देश के भीतर और बाहर संघर्ष कर रहे अपने लोगों का बोझ अपने कंधों पर महसूस करते हैं और पहले से कहीं ज्यादा जिम्मेदारी के साथ सूडान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

जश्न मनाने की एक वजह

राजनीतिक और सुरक्षा जोखिम विश्लेषक थॉमस ओ’डोनोघ्यू के अनुसार, सूडानी लोग अपनी टीम के साथ इसलिए खड़े हैं क्योंकि यह देश का एक गैर-राजनीतिक प्रतीक है। उन्होंने एपी से कहा, “यह लोगों को एकजुट करता है और उन्हें किसी ऐसी चीज़ की याद दिलाता है, जिसका जश्न मनाया जा सकता है।”

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल फुटबॉल टीम ही युद्धरत पक्षों को संघर्षविराम या बातचीत के लिए मजबूर नहीं कर सकती। “यह संघर्ष लगभग तीन साल से जारी है और इसमें कई घरेलू व अंतरराष्ट्रीय हितधारक शामिल हैं, जिनके सूडान में आर्थिक हित भी हैं,” उन्होंने कहा।

सूडान ने अफ्रीका कप का पहला मैच अल्जीरिया से हार दिया है और अब वह बुर्किना फासो और इक्वेटोरियल गिनी के खिलाफ अच्छे नतीजों के साथ ग्रुप से आगे बढ़ने की उम्मीद करेगा। हालांकि टीम को चोटों की समस्या भी झेलनी पड़ रही है—तीन फॉरवर्ड, टीम कप्तान और एक फुल-बैक टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं।

अल्जीरिया से हार के बाद सूडान के कोच जेम्स क्वेसी अप्पियाह ने कहा, “स्थिति मुश्किल है। कभी-कभी इस पर बात करना भी सहज नहीं लगता, लेकिन उपलब्ध खिलाड़ियों के साथ जितना संभव हो, उतना बेहतर करना पड़ता है।”

मोरक्को में खेल रहे सूडानी खिलाड़ी यथासंभव आगे तक जाने और ट्रॉफी उठाने का सपना देख रहे हैं।

तैफूर ने कहा, “हर मैच से पहले मैं सूडान में अपने लोगों के लिए प्रार्थना करता हूं। वे खुशी के हकदार हैं और मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करता हूं कि वह खुशी उन्हें दे सकूं।”

(एपी) यूएनजी

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