
जैसे-जैसे 2025 समाप्त हो रहा है, वैश्विक व्यवस्था एक साल पहले की तुलना में अधिक खंडित, अधिक लेन-देन आधारित और अधिक सुरक्षा-केंद्रित दिखाई देती है। बड़े संघर्ष बिना स्पष्ट समाधान के जारी रहे, नेतृत्व में बदलावों ने गठबंधनों की गणित बदल दी, और आर्थिक राष्ट्रवाद नाज़ुक आपूर्ति शृंखलाओं से टकराया। इसी दौरान, जलवायु झटके और एआई नियमन “नीतिगत बहस” से आगे बढ़कर ठोस भू-राजनीतिक कारक बन गए।
नीचे 2025 में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा को सबसे निर्णायक रूप से प्रभावित करने वाली 15 घटनाएँ दी गई हैं:
1) ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी, “अमेरिका फर्स्ट” कूटनीति का पुनरुत्थान (20 जनवरी)
डोनाल्ड ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया, जिससे अमेरिकी विदेश नीति का रुख फिर से कड़ा बोझ-वितरण, सख्त व्यापार रुख और सहयोगियों के लिए अधिक अनिश्चितता की ओर मुड़ गया।
2) टैरिफ दबाव और आर्थिक राष्ट्रवाद ने कूटनीति को नया रूप दिया
विशेषकर टैरिफ से जुड़े संरक्षणवादी फैसले अमेरिकी बाह्य संबंधों का प्रमुख औज़ार बने, जिनका असर वैश्विक व्यापार वार्ताओं और साझेदार देशों की रणनीतियों पर पड़ा। 2025 के अंत में भारत की निर्यात और टैरिफ वार्ताएँ दिखाती हैं कि व्यापार नीति और भू-राजनीति अब साथ-साथ चल रही हैं।
3) रूस–यूक्रेन युद्ध चौथे वर्ष में प्रवेश; लंबी दूरी के हमले और बदलते “शांति वार्ता” संकेत
यह संघर्ष थकाऊ जंग बना रहा। ड्रोन और मिसाइल हमले, बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना और बदलते कूटनीतिक संकेतों ने तनाव बढ़ाए रखा। इस युद्ध ने गुटों को सख्त किया, रक्षा बजट बढ़ाए और ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा की धारणाओं को प्रभावित किया।
4) गाज़ा में मानवीय त्रासदी गहराई; अकाल की पुष्टि (अगस्त)
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने अगस्त 2025 में गाज़ा के कुछ हिस्सों में अकाल की पुष्टि की, जिससे पश्चिमी राजधानियों पर दबाव बढ़ा और युद्ध संचालन, मानवीय पहुँच तथा जवाबदेही पर मतभेद तीखे हुए।
5) गाज़ा युद्धविराम लागू; आंशिक आवाजाही और वापसी संभव (10 अक्टूबर)
10 अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम से कुछ आबादी की आवाजाही और ज़मीनी बदलाव संभव हुए, हालांकि व्यापक राजनीतिक अंत-स्थिति विवादित और नाज़ुक बनी रही।
6) अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु ठिकानों पर हमले; मध्य पूर्व उच्च-जोखिम चरण में (जून)
जून 2025 में अमेरिकी हमलों ने तनाव को तेज़ी से बढ़ाया, क्षेत्रीय प्रतिशोध के चक्रों की आशंका बढ़ी और खाड़ी व लेवेंट में प्रतिरोधक संतुलन पुनः परिभाषित हुआ।
7) असद-पश्चात सीरिया का संक्रमण अस्थिर; संप्रदायिक तनाव जारी (पूरे 2025)
दिसंबर 2024 में असद के हटने के बाद 2025 में सत्ता समेकन और संक्रमणकालीन सरकार के प्रयास हुए, पर हिंसा, हिरासत और संप्रदायिक अविश्वास—खासकर तटीय क्षेत्रों में—जारी रहा।
8) थाईलैंड का राजनीतिक संकट; संस्थागत अस्थिरता उजागर (अगस्त)
अगस्त 2025 में संवैधानिक न्यायालय द्वारा प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा को हटाए जाने के बाद भारी उथल-पुथल हुई, जिससे लोकतांत्रिक क्षरण और अस्थिरता को लेकर क्षेत्रीय चिंताएँ बढ़ीं।
9) “अनिश्चितता” के साये में जी7; व्यापार और सुरक्षा का घनिष्ठ संबंध
जी7 की 2025 बैठकों में यह स्पष्ट हुआ कि आपूर्ति शृंखलाएँ, प्रतिबंध, औद्योगिक नीति और तकनीकी नियंत्रण जैसे मुद्दों पर आर्थिक नीति अब राष्ट्रीय सुरक्षा से अलग नहीं है।
10) नाटो की एकजुटता घरेलू राजनीति और बोझ-वितरण से परखी गई
नीदरलैंड्स में 2025 नाटो शिखर सम्मेलन में रक्षा खर्च और गठबंधन प्रतिबद्धताओं को विश्वसनीयता व क्षमता के संदर्भ में देखा गया—अमेरिकी राजनीतिक बदलावों और यूरोपीय सुरक्षा दबावों के बीच।
11) न्यू स्टार्ट की समयसीमा नज़दीक; परमाणु हथियार नियंत्रण संकट के कगार पर (फरवरी 2026)
5 फरवरी 2026 को न्यू स्टार्ट की समाप्ति से पहले 2025 चेतावनी संकेतों से भरा रहा—सीमित कूटनीतिक प्रगति, कम पारदर्शिता और बदतर हालात की तैयारी।
12) परमाणु आधुनिकीकरण तेज़; “नई हथियार दौड़” की कथा मजबूत
SIPRI की 2025 रिपोर्टों ने कमजोर पड़ते हथियार नियंत्रण और परमाणु-सशस्त्र देशों में आधुनिकीकरण को रेखांकित किया। चीन के शस्त्रागार विस्तार और उच्च अलर्ट रुख ने रणनीतिक योजना को प्रभावित किया।
13) उत्तर कोरिया का परीक्षण सिलसिला जारी; पूर्वोत्तर एशिया में जोखिम (2025 के अंत)
लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों सहित निरंतर परीक्षणों ने प्रतिरोधक समीकरणों को अस्थिर रखा और तकनीक हस्तांतरण व क्षेत्रीय तनाव की आशंकाएँ बढ़ाईं।
14) चीन की क्रिटिकल मिनरल्स पर पकड़ मजबूत; रेयर अर्थ नियंत्रण सख्त
रेयर अर्थ्स पर निर्यात नियंत्रण ने दिखाया कि “जियो-इकोनॉमिक्स” अब अग्रिम मोर्चा है—जिसका असर रक्षा आपूर्ति शृंखलाओं, इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी और रणनीतिक विनिर्माण पर पड़ा।
15) एआई शासन और जलवायु सुरक्षा मुख्यधारा में (EU AI Act + COP30)
EU AI Act के क्रियान्वयन मार्ग ने उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक नियामक टेम्पलेट का संकेत दिया, जबकि ब्राज़ील के बेलेम में COP30 ने जलवायु प्रभावों और लचीलापन वित्त को राष्ट्रीय सुरक्षा योजना के केंद्र में रखा।
“प्रतिस्पर्धी प्रबंधन” मोड में विश्व व्यवस्था
2025 का समग्र पैटर्न किसी एक नए गठबंधन तंत्र का नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी प्रबंधन की ओर स्थायी झुकाव का था—देश हेजिंग कर रहे हैं, आर्थिक औज़ारों का हथियारकरण हो रहा है, सीमाएँ और बफर सख्त हो रहे हैं, और तकनीक व जलवायु को सुरक्षा क्षेत्र माना जा रहा है। असद के बाद सीरिया का संक्रमण, गाज़ा का अकाल और युद्धविराम की गतिशीलता, तथा न्यू स्टार्ट की समयसीमा—सब संकेत देते हैं कि 2026 कम सुरक्षा-रेलिंग्स के साथ शुरू होगा।
— मनोज एच
