नई दिल्ली, 31 दिसंबर (पीटीआई) — असम में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन का मॉड्यूल खड़ा करने के मामले में एक व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को यह जानकारी दी।
एनआईए के अनुसार, मोहम्मद कमरुज्जमां उर्फ कमरुद्दीन को गुवाहाटी स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने आतंकवाद-रोधी कानून के तहत तीन अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया। इन तीनों सजाओं में अधिकतम सजा आजीवन कारावास है, जो एक साथ (साथ-साथ) चलेंगी।
अदालत ने दोषी पर प्रत्येक मामले में 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे प्रत्येक मामले में तीन महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
एनआईए के बयान के अनुसार, कमरुज्जमां को वर्ष 2017-18 के दौरान प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (एचएम) का असम में मॉड्यूल खड़ा करने और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश रचने का दोषी पाया गया। इस साजिश का उद्देश्य आम लोगों के मन में आतंक फैलाना था।
जांच में यह सामने आया कि कमरुज्जमां ने शहनवाज आलम, सैदुल आलम, उमर फारूक सहित कुछ अन्य लोगों को इस आतंकी नेटवर्क के लिए भर्ती किया था।
एनआईए ने मार्च 2019 में इस मामले में कुल पांच आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें से शहनवाज, सैदुल और उमर ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद उन्हें दोषी ठहराया गया। वहीं, पांचवें आरोपी जयनाल उद्दीन की मुकदमे के दौरान बीमारी से मृत्यु हो गई, एजेंसी ने बताया।
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