हरियाणा के मुख्यमंत्री ने श्रम विभाग में ‘अनियमितताओं’ की जांच के लिए जांच समिति गठित की

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image posted on Dec. 12, 2025, Haryana Chief Minister Nayab Singh Saini interacts with students during a district-level essay writing competition held on 'Veer Baal Diwas', in Chandigarh. (@NayabSainiBJP/X via PTI Photo)(PTI12_12_2025_000357B)

चंडीगढ़, 2 जनवरी (पीटीआई): हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने श्रम विभाग में कार्य पर्चियों (वर्क स्लिप्स) के सत्यापन और श्रमिकों के पंजीकरण में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस समिति का गठन आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की अध्यक्षता में किया गया है, जबकि आईएएस अधिकारी राजीव रत्तन और आईपीएस अधिकारी पंकज नैन इसके सदस्य हैं। समिति मामले की गहन जांच करेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब कुछ दिन पहले हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज ने आरोप लगाया था कि हरियाणा भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में कार्य पर्चियों से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं लंबे समय से चली आ रही हैं।

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह घोटाला लगभग 1,500 करोड़ रुपये का हो सकता है। विज ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी से मामले की विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की थी।

हालांकि, गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि श्रम मंत्री ने इस संबंध में मुख्यमंत्री सैनी को पत्र लिखा था, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय को ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ

बयान में कहा गया, “फिर भी, इस मुद्दे से संबंधित एक फाइल विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई थी, जिसमें मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि विभाग ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है और 13 जिलों से रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है, जबकि शेष नौ जिलों की रिपोर्ट अभी लंबित है।”

इसमें कहा गया, “इसलिए विभाग ने बताया कि शेष जिलों से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद एक सम्पूर्ण रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।”

बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और अगले ही दिन फाइल वापस करते हुए श्रम मंत्री को निर्देश दिया कि सभी जिलों से पूरी रिपोर्ट के साथ वित्तीय नुकसान के सटीक आंकड़े भी प्रस्तुत किए जाएं।

“हालांकि, यह रिपोर्ट अभी तक लंबित है। यह मामला निर्माण श्रमिकों और श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत उन्हें दिए जाने वाले लाभों से संबंधित है। आरोप है कि जिन कार्यों के आधार पर इन व्यक्तियों ने श्रम करने का दावा किया, वे वास्तविक नहीं थे, जिससे भवन एवं निर्माण श्रमिकों के रूप में उनके पंजीकरण पर संदेह उत्पन्न होता है,” बयान में कहा गया।

— पीटीआई सीएचएस आरएचएल