
नई दिल्ली, 1 जनवरी (पीटीआई) — कांग्रेस पार्टी के लिए वर्ष 2025 बेहद निराशाजनक रहा। बिहार और दिल्ली में उसे अपने सबसे खराब चुनावी प्रदर्शन का सामना करना पड़ा, वहीं कर्नाटक जैसे उन गिने-चुने राज्यों में, जहां वह अकेले सत्ता में है, गुटबाजी की समस्याएं उभरकर सामने आईं। हालांकि, केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में मिले उत्साहजनक नतीजों ने पार्टी को 2026 की ओर देखते हुए नई उम्मीद दी है।
पार्टी के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल सहित वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि केरल के नतीजे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले सकारात्मक संकेत हैं, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्तारूढ़ एलडीएफ को चुनौती देगा। कांग्रेस को असम से भी उम्मीदें हैं, हालांकि वह भाजपा के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की मजबूत चुनौती को स्वीकार करती है।
पूरे वर्ष संगठनात्मक कमजोरी कांग्रेस के लिए बड़ी चिंता बनी रही। वरिष्ठ नेताओं ने खुले तौर पर जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत करने की मांग की। दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की वकालत करते हुए आरएसएस के अनुशासित कैडर मॉडल की सराहना की, जिसे शशि थरूर का भी समर्थन मिला।
केरल कांग्रेस के लिए एक अहम रणभूमि बना हुआ है, हालांकि यहां भी आंतरिक चुनौतियां मौजूद हैं। मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार सामने हैं और पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि महत्वाकांक्षाओं का संतुलन साधना बड़ी चुनौती होगी। के सी वेणुगोपाल को इस दौड़ में एक प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।
कर्नाटक में भी गुटीय तनाव साफ दिखा, जहां मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच मतभेद बार-बार सामने आए। हालांकि पार्टी नेता गंभीर मतभेदों से इनकार करते हैं, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आगे और गहरा सकता है।
2025 में कांग्रेस ने अपने नए मुख्यालय इंदिरा भवन में स्थानांतरित होकर 24 अकबर रोड में 50 वर्षों के प्रवास को समाप्त किया। इसके तुरंत बाद दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा और वह लगातार दूसरी बार एक भी सीट जीतने में नाकाम रही, जबकि 27 साल बाद भाजपा ने सत्ता में वापसी की।
इसके बाद बिहार में कांग्रेस को एक और झटका लगा, जहां पार्टी ने केवल छह सीटें जीतीं और अधिकांश सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई। पार्टी का “वोट चोरी” अभियान असरदार साबित नहीं हुआ और वह एआईएमआईएम और एचएएम से मामूली अंतर से आगे रही।
उपचुनावों के नतीजे मिले-जुले रहे, लेकिन पंजाब की तरनतारन सीट पर आम आदमी पार्टी से हार ने 2027 से पहले राज्य में पार्टी की संभावनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी।
हालांकि कांग्रेस ने संविधान में बदलाव और चुनाव आयोग पर आरोपों को लेकर भाजपा पर हमले कर राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की, लेकिन ये रणनीतियां चुनावी सफलता में तब्दील नहीं हो सकीं। राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और जेन ज़ी को साधने की कोशिशें भी बिहार में प्रभाव नहीं छोड़ पाईं।
इन तमाम झटकों के बावजूद, कांग्रेस केरल के स्थानीय निकाय चुनावों में मिली सफलता से आशावान है। 2026 में पार्टी को असम में मजबूत भाजपा, केरल में सीपीआई(एम), पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु में सहयोगी डीएमके के साथ सत्ता विरोधी लहर जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना होगा।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
एसईओ टैग्स: #स्वदेशी, #न्यूज़, एक साल की कई असफलताओं के बाद 2026 में पुनरुत्थान की उम्मीद में कांग्रेस
