नई दिल्ली, 2 जनवरी (PTI) – दिल्ली की एक अदालत ने पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर स्थित एक मंदिर के कमरे में 2017 में एक व्यक्ति की हत्या करने और शव को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश के मामले में एक पुजारी और उसकी पत्नी को दोषी ठहराया है।
अपर सत्र न्यायाधीश अनुराग ठाकुर ने पुजारी लखन दुबे और उसकी पत्नी कमलेश को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत गायब करना) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी करार दिया।
अदालत ने कहा कि चंदर शेखर का शव 27 सितंबर 2017 को उसी मंदिर के कमरे में मिला था, जहां दुबे पुजारी के रूप में काम करता था और जहां तक उसकी विशेष पहुंच थी, जिसमें कमरे तक जाने वाली सीढ़ी की चाबी भी उसके पास थी।
अपने 26 दिसंबर के फैसले में अदालत ने कहा,
“साबित परिस्थितियां निर्णायक प्रकृति की हैं और वे अभियुक्त दुबे और कमलेश के दोष के अलावा हर अन्य संभावित परिकल्पना को बाहर कर देती हैं। इस मामले में सबूतों की कड़ी इतनी पूर्ण है कि अभियुक्तों की निर्दोषता के अनुरूप किसी भी निष्कर्ष की कोई गुंजाइश नहीं बचती।”
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुजारी की पत्नी और मृतक के बीच संबंध थे। हालांकि यह संबंध सहमति से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में कमलेश ने अपने पति को बताया कि चंदर शेखर ने उसके बच्चों को मारने की धमकी देकर उसे संबंध बनाए रखने के लिए मजबूर किया।
इसके बाद कमलेश और दुबे ने चंदर शेखर की हत्या की साजिश रची।
अभियोजन का कहना था कि 25 सितंबर 2017 को कमलेश ने अपने पति के बाहर होने का बहाना बनाकर चंदर शेखर को दिल्ली बुलाया, उसके खाने में नींद की गोलियां मिला दीं और उसके बेहोश होने के बाद कमलेश और दुबे ने रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
अदालत के अनुसार, बाद में पहचान छिपाने के लिए शव को केरोसिन और कपूर डालकर जला दिया गया।
चिकित्सकीय साक्ष्यों से मृत्यु का कारण हत्या होना सिद्ध हुआ।
फोरेंसिक रिपोर्ट में शव के पास केरोसिन के अवशेष और नशीली दवाओं की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिससे अभियोजन का पक्ष मजबूत हुआ।
अदालत ने घटना से कुछ समय पहले अभियुक्तों और मृतक के बीच लगातार संपर्क दर्शाने वाले कॉल डिटेल रिकॉर्ड, अभियुक्तों के कहने पर की गई बरामदगियों और उनके द्वारा कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण न दिए जाने को भी आधार बनाया।
अदालत ने कहा कि फोरेंसिक प्रयोगशाला को नमूने भेजने में देरी या सार्वजनिक गवाहों को शामिल न करने जैसी छोटी-मोटी कमियां अभियोजन के विश्वसनीय मामले को कमजोर नहीं करतीं।
अदालत ने दोष सिद्ध करते हुए कहा,
“मानवीय संभावना के अनुसार, अभियुक्तों ने चंदर शेखर की हत्या की साजिश रची, उसकी हत्या की और फिर उसके शव को जलाकर तथा उसके कपड़े एक खाली प्लॉट में फेंककर सबूत नष्ट करने का प्रयास किया।”
अदालत सजा की मात्रा पर 7 जनवरी को दलीलें सुनेगी।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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