
नई दिल्ली, 2 जनवरी (पीटीआई): केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि छोटे और मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर एआई-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए डेटा सेंटरों तथा रेलवे की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यवहारिक और व्यावहारिक समाधान प्रदान करते हैं।
रेलवे मंत्री ने कहा कि ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (शांति) विधेयक के पारित होने से देश भविष्य की नई अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो गया है।
दिल्ली में एक कार्यक्रम के इतर पत्रकारों से बातचीत में वैष्णव ने कहा, “जैसे-जैसे दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपना रही है, डेटा सेंटर एआई-आधारित अर्थव्यवस्था को शक्ति देंगे। इन डेटा सेंटरों को भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी, जो केवल परमाणु ऊर्जा से ही आ सकती है।”
मंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा ही ऐसा स्रोत है, जो बिना किसी प्रदूषण के टिकाऊ बेस लोड और भारी करंट की आपूर्ति कर सकता है।
वैष्णव ने बताया कि नए डिज़ाइन के कारण कंटेनर के भीतर ही परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना संभव हो गया है, जिन्हें मात्र 14 एकड़ भूमि पर लगाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि 15–30 मेगावाट क्षमता के वे परमाणु संयंत्र, जो जहाजों को ऊर्जा प्रदान करने के लिए उपयोग किए जाते हैं, रेलवे संचालन के लिए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
“रेलवे देशभर में 700 स्थानों पर ग्रिड से बिजली लेता है। छोटे और मॉड्यूलर रिएक्टर ऊर्जा के एक टिकाऊ स्रोत के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं,” वैष्णव ने कहा।
उन्होंने बताया कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में कई अंतर्निहित निष्क्रिय सुरक्षा विशेषताएं होती हैं, जो इनके बड़े पैमाने पर उपयोग को संभव बनाती हैं।
वैष्णव ने कहा, “शांति विधेयक इसलिए पारित किया गया ताकि परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत बन सके।”
शांति विधेयक, जो निजी क्षेत्र की कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की अनुमति देता है, पिछले महीने शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा से पारित हुआ था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शांति अधिनियम को अपनी मंजूरी दे दी है।
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