नई दिल्ली, 2 जनवरी (पीटीआई): कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि ग्रेट निकोबार जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को सरकार द्वारा जल्दबाजी में मंजूरी देना पूरे क्षेत्र के लिए खतरनाक साबित होगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ये परियोजनाएं न केवल वहां की नाजुक पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति पहुंचाएंगी, बल्कि स्वदेशी (आदिवासी) समुदायों के अस्तित्व को भी व्यवस्थित रूप से हाशिये पर धकेल देंगी।
रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ग्रेट निकोबार जैसे अत्यंत पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में विकास के नाम पर, लालच और अदूरदर्शिता से प्रेरित होकर हजारों करोड़ रुपये की आक्रामक परियोजनाओं को जल्दबाजी में मंजूरी देना पूरे क्षेत्र के लिए खतरनाक और दीर्घकालिक त्रासदी साबित होगा।
यह पूरा क्षेत्र पहले से ही जलवायु आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है, जहां प्राकृतिक संतुलन से थोड़ी सी भी छेड़छाड़ विनाशकारी परिणाम ला सकती है। इसके बावजूद, सरकार ने चेतावनियों, वैज्ञानिक आकलनों और स्थानीय वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हुए कुछ कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे के लालच में इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है।”
पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री रमेश ने ‘ग्रेट निकोबार: द स्टोरी ऑफ ए बिट्रेयल’ (Great Nicobar: The Story of a Betrayal) नामक एक पुस्तक का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि यह पुस्तक सरकार की भूमिका, नीतिगत लापरवाही और शोध-आधारित, तथ्यपरक व प्रासंगिक लेखों के माध्यम से आदिवासी अधिकारों के साथ किए जा रहे समझौतों की गहन जांच करती है।
उन्होंने कहा, “यह संकलन इस बात का जीवंत दस्तावेजी प्रमाण है कि किस तरह विकास के नाम पर एक पूरे क्षेत्र और उसके लोगों का भविष्य दांव पर लगा दिया गया है।”
कांग्रेस ग्रेट निकोबार विकास परियोजना का विरोध करती रही है और उसका दावा है कि यह परियोजना क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी को नष्ट कर देगी।
पीटीआई SKC RC
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