हिमाचल: छात्रा से रैगिंग के आरोप में तीन छात्राएं, यौन उत्पीड़न के मामले में कॉलेज प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज

Businessman booked for firing in air in Beed

शिमला/धर्मशाला (हि.प्र.), 2 जनवरी (पीटीआई): हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित एक सरकारी कॉलेज की तीन छात्राओं के खिलाफ रैगिंग और स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है, जबकि एक प्रोफेसर पर 19 वर्षीय छात्रा के यौन उत्पीड़न का केस दर्ज हुआ है। छात्रा की 26 दिसंबर को इलाज के दौरान लुधियाना के एक अस्पताल में मौत हो गई थी, पुलिस ने शुक्रवार को बताया।

पुलिस के अनुसार, मामला गुरुवार को पीड़िता के पिता की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 18 सितंबर 2025 को तीन सीनियर छात्राओं—हर्षिता, आकृति और कोमोलिका—ने उनकी बेटी की पिटाई की, जबकि कॉलेज के प्रोफेसर अशोक कुमार ने उसके साथ अश्लील हरकतें कीं।

शिकायत में कहा गया है कि मारपीट और उत्पीड़न के कारण छात्रा को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद उनकी बेटी गंभीर मानसिक तनाव और भय में चली गई, जिससे उसकी सेहत तेजी से बिगड़ती चली गई।

उन्होंने बताया कि बेटी की मानसिक स्थिति और अस्पताल में भर्ती होने के कारण पहले शिकायत दर्ज नहीं कराई जा सकी।

पुलिस ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 3(5) (सामान्य आशय) तथा हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रैगिंग निषेध) अधिनियम, 2009 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अशोक रतन ने पुष्टि की कि सभी आरोपों की गहन जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिकॉर्ड, वीडियो साक्ष्य और संबंधित सभी लोगों के बयान खंगाले जा रहे हैं।

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब छात्रा की मौत से पहले कथित तौर पर रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में पीड़िता ने प्रोफेसर पर अशोभनीय हरकतों, मानसिक उत्पीड़न और विरोध करने पर डराने-धमकाने के आरोप लगाए थे।

पुलिस ने बताया कि शुरुआत में मुख्यमंत्री संकल्प सेवा हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत मिली थी और एक जांच टीम गठित की गई थी, लेकिन उस समय छात्रा की तबीयत खराब होने के कारण उसका बयान दर्ज नहीं किया जा सका। बाद में पुलिस ने पीड़िता के पिता का बयान दर्ज किया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृत छात्रा ने 2024 में कॉलेज में दाखिला लिया था। कथित तौर पर उसे कुछ छात्रों द्वारा रैगिंग का सामना करना पड़ा और वह बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा में असफल रही। जुलाई 2025 में परिणाम घोषित होने के बाद उसने कॉलेज आना बंद कर दिया और 21 अगस्त 2025 को उसका नाम कॉलेज के रोल से काट दिया गया। माना जा रहा है कि सितंबर में वह दोबारा दाखिले के लिए कॉलेज गई थी, जहां उसे बताया गया कि पुनर्मूल्यांकन में पास होने पर ही उसे दूसरे वर्ष में प्रवेश मिलेगा, अन्यथा पहले वर्ष में फिर से नामांकन करना होगा।

इस बीच, आरोपी प्रोफेसर ने सभी आरोपों से इनकार किया है। कुछ शिक्षकों ने उनके समर्थन में बयान भी दिए हैं। प्रोफेसर का कहना है कि छात्रा ने उनसे पिछले शैक्षणिक सत्र में पढ़ाई की थी और वर्तमान सत्र में वह उनकी छात्रा नहीं थी।

एबीवीपी की प्रदेश सचिव नैन्सी अटल ने कहा कि दोषियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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