
दुबई, 4 जनवरी (एपी) — ईरान के सर्वोच्च नेता ने शनिवार को कहा कि “उपद्रवियों को उनकी जगह दिखानी होगी”, ऐसे समय में जब एक हफ्ते से जारी विरोध प्रदर्शनों ने इस्लामिक गणराज्य को हिला कर रख दिया है। यह बयान सुरक्षा बलों को प्रदर्शनों को सख्ती से कुचलने की खुली छूट देने के तौर पर देखा जा रहा है।
86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की ये पहली टिप्पणियां ऐसे वक्त आई हैं जब खराब होती अर्थव्यवस्था के कारण भड़के प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है।
प्रदर्शनों के थमने के कोई संकेत नहीं हैं। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि यदि तेहरान “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या करता है” तो अमेरिका “उनकी मदद के लिए आगे आएगा।” यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप कैसे या क्या हस्तक्षेप करेंगे, लेकिन उनके बयान से तुरंत तीखी प्रतिक्रिया हुई। ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर अधिकारियों ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी। इन बयानों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है, जो तेहरान के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं।
ये विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़े माने जा रहे हैं, जब 22 वर्षीय महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशव्यापी प्रदर्शन हुए थे। हालांकि, मौजूदा प्रदर्शन अभी अमीनी की मौत के बाद हुए प्रदर्शनों जितने व्यापक या तीव्र नहीं हैं। अमीनी को हिजाब सही ढंग से न पहनने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
खामेनेई की पहली प्रतिक्रिया
राज्य टीवी पर प्रसारित अपने संबोधन में खामेनेई ने तेहरान में मौजूद श्रोताओं से कहा कि रियाल के गिरने से नाराज़ प्रदर्शनकारियों और “उपद्रवियों” के बीच फर्क किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हम प्रदर्शनकारियों से बात करते हैं, अधिकारियों को भी उनसे बात करनी चाहिए। लेकिन उपद्रवियों से बात करने का कोई फायदा नहीं। उपद्रवियों को उनकी जगह दिखानी होगी।”
उन्होंने एक बार फिर यह दावा दोहराया कि इज़राइल या अमेरिका जैसी विदेशी ताकतें इन प्रदर्शनों को भड़का रही हैं, हालांकि इसके समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। उन्होंने ईरान की मुद्रा रियाल के गिरने के लिए भी “दुश्मन” को जिम्मेदार ठहराया।
खामेनेई ने कहा, “दुश्मन द्वारा उकसाए या किराए पर लिए गए कुछ लोग व्यापारियों और दुकानदारों के पीछे लगकर इस्लाम, ईरान और इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। यही सबसे गंभीर बात है।”
ईरान की अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड में स्वयंसेवी बसिज बल भी शामिल है, जिसके मोटरसाइकिल सवार सदस्यों ने 2009 के ग्रीन मूवमेंट और 2022 के प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाया था। यह गार्ड सीधे खामेनेई को जवाबदेह है।
माना जा रहा है कि देश के कट्टरपंथी अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई के पक्ष में हैं, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान उनकी मांगों को लेकर बातचीत की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अतीत में ऐसे प्रदर्शनों के बाद अक्सर खूनी दमन देखने को मिला है। 2019 में पेट्रोल की कीमत बढ़ने के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में कथित तौर पर 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे। 2022 के अमीनी विरोध प्रदर्शनों के दमन में 500 से अधिक लोगों की मौत हुई और 22,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया।
यूरोएशिया ग्रुप ने शुक्रवार को एक विश्लेषण में कहा, “ईरान में कोई संगठित घरेलू विपक्ष नहीं है; प्रदर्शनकारी संभवतः स्वतःस्फूर्त रूप से कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि विरोध जारी रह सकता है या बढ़ सकता है, लेकिन शासन के पास बड़ा सुरक्षा तंत्र है और वह नियंत्रण खोए बिना असंतोष को दबा सकता है।”
रातोंरात हुई मौतें
शनिवार तड़के हुई दो मौतों में हिंसा का नया स्तर देखने को मिला। क़ोम में, जो शिया धर्मगुरुओं का प्रमुख केंद्र है, एक ग्रेनेड विस्फोट में एक व्यक्ति की मौत हो गई। सरकारी अखबार ईरान ने सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि वह व्यक्ति हमले के लिए ग्रेनेड ले जा रहा था।
दूसरी मौत हरसिन कस्बे में हुई, जहां बसिज बल के एक सदस्य की गोली और चाकू से किए गए हमले में मौत हो गई।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शन 31 में से 25 प्रांतों के 170 से ज्यादा स्थानों तक फैल चुके हैं। एजेंसी ने बताया कि मरने वालों की संख्या कम से कम 15 हो गई है और 580 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं।
राज्य संचालित इरना समाचार एजेंसी ने इलाम प्रांत के मलिकशाही काउंटी में हिंसा की खबर दी, लेकिन कोई विवरण नहीं दिया। कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगाव और ओस्लो स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स ने वहां चार मौतों का दावा किया और सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आरोप लगाया।
अर्धसरकारी फार्स समाचार एजेंसी ने बिना सबूत के आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के पास हथियार और ग्रेनेड थे। हालांकि सरकार ने इस दावे के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।
आर्थिक मुद्दों से शुरू हुए इन प्रदर्शनों में अब ईरान की धार्मिक सत्ता के खिलाफ भी नारे सुनाई दे रहे हैं। जून में इज़राइल के साथ हुए युद्ध और अमेरिकी हमलों के बाद से ईरान की अर्थव्यवस्था को संभालने में तेहरान को काफी मुश्किलें आ रही हैं।
हाल ही में ईरान ने कहा कि उसने देश में किसी भी स्थान पर यूरेनियम संवर्धन बंद कर दिया है, ताकि पश्चिम को यह संकेत दिया जा सके कि वह परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए खुला है। हालांकि, ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की चेतावनियों के बीच अब तक कोई वार्ता शुरू नहीं हुई है। (एपी) GSP
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