न्याय का मज़ाक: उमर ख़ालिद को ज़मानत न दिए जाने पर महबूबा मुफ़्ती

Jammu: Peoples Democratic Party (PDP) President Mehbooba Mufti during a party workers' meeting at PDP office in Jammu, Monday, Dec. 22, 2025. (PTI Photo)(PTI12_22_2025_000111B)

श्रीनगर, 5 जनवरी (पीटीआई)

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने सोमवार को कहा कि 2020 दिल्ली दंगों के मामले में कार्यकर्ता उमर ख़ालिद को ज़मानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार करना “न्याय का मज़ाक” है, जबकि बलात्कार के दोषी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल दी जाती रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 दिल्ली दंगों की साज़िश मामले में कार्यकर्ता उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को ज़मानत देने से इनकार कर दिया, लेकिन “भागीदारी के स्तर” (हायरार्की ऑफ पार्टिसिपेशन) का हवाला देते हुए पांच अन्य आरोपियों को ज़मानत दे दी। अदालत ने कहा कि इस मामले में सभी आरोपी समान स्थिति में नहीं हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि उमर ख़ालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

महबूबा मुफ़्ती ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा,

“कितना बड़ा न्याय का मज़ाक है। एक तरफ बलात्कार और हत्या का दोषी गुरमीत सिंह बार-बार पैरोल पर बाहर आता है। दूसरी तरफ उमर ख़ालिद, जो अभी केवल आरोपी है और जिसका मुकदमा भी शुरू नहीं हुआ है, पिछले पांच साल से ज़्यादा समय से जेल में बंद है और आज भारत के सर्वोच्च न्यायालय से भी उसे बार-बार ज़मानत से वंचित किया गया। अन्याय के बोझ तले न्याय का तराजू टूटता दिख रहा है।”

सुप्रीम कोर्ट ने जिन लोगों को ज़मानत दी है, उनमें कार्यकर्ता गुलफ़िशा फ़ातिमा, मीरान हैदर, शिफ़ा उर रहमान, मोहम्मद सलीम ख़ान और शादाब अहमद शामिल हैं।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

पीटीआई MIJ DIV DIV