नई दिल्ली, 5 जनवरी (पीटीआई)
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आगरा जिले के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण के आरोपों वाली याचिका पर केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। यह मामला विशेष रूप से ताजमहल के आसपास और आगरा–ग्वालियर राजमार्ग के किनारे से जुड़ा है।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ इस क्षेत्र में हरित आवरण के विनाश से संबंधित याचिका की सुनवाई कर रही थी।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि आगरा विकास प्राधिकरण ताजमहल और आगरा किले के बीच स्थित सौ साल से अधिक पुराने शाहजहां पार्क में “कियोस्क, पक्के रास्ते और ईंट-सीमेंट के ढांचे” का निर्माण कर रहा है।
23 दिसंबर को पारित आदेश में पीठ ने आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के निर्माण के दौरान सदी पुराने पेड़ों की जड़ों के पास गड्ढे खोदे गए, हरित आवरण नष्ट किया गया और पक्षियों व तितलियों के आवास को नुकसान पहुंचा।
अधिकरण ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता का आरोप है कि आगरा नगर निगम ग्वालियर रोड पर मधु नगर के आगे हरित पट्टी में अवैध रूप से एक सेल्फी प्वाइंट के लिए कंक्रीट का ढांचा खड़ा कर रहा है।
याचिका के अनुसार, कई निजी व्यक्तियों ने भी राजमार्ग के दोनों ओर अनिवार्य हरित पट्टी में पेड़ों की कटाई कर भवन निर्माण कर लिया है।
एनजीटी ने कहा, “मूल आवेदन में पर्यावरणीय मानदंडों के अनुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए।”
इस मामले में प्रतिवादी पक्षों में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आगरा के जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त और जिला वन अधिकारी, ताज ट्रेपेज़ियम ज़ोन प्राधिकरण तथा आगरा विकास प्राधिकरण शामिल हैं।
मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को निर्धारित की गई है।
पीटीआई MNR MNR KVK KVK

