
न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन, 5 जनवरी (पीटीआई)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से “खुश नहीं” थे और वॉशिंगटन नई दिल्ली पर “बहुत जल्दी” शुल्क (टैरिफ) बढ़ा सकता है। ट्रंप ने यह टिप्पणी रविवार को फ्लोरिडा से वॉशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की।
“वे (भारत) मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं; वह अच्छे व्यक्ति हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था और मुझे खुश करना अहम था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा,” ट्रंप ने कहा।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब उनके साथ एयर फोर्स वन में मौजूद अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ ही “मुख्य वजह” हैं कि अब नई दिल्ली रूसी तेल काफी कम मात्रा में खरीद रही है।
ग्राहम ने अपने उस टैरिफ विधेयक का जिक्र किया, जिसमें रूसी तेल खरीदने वाले देशों से आयात पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष समाप्त करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ग्राहकों पर दबाव डालना जरूरी है।
ट्रंप ने कहा कि प्रतिबंध रूस को “बहुत बुरी तरह” नुकसान पहुंचा रहे हैं और फिर भारत का उल्लेख किया। इस पर ग्राहम ने कहा कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।
“मैं करीब एक महीने पहले भारतीय राजदूत के घर गया था और वह बस इस बात पर चर्चा करना चाहते थे कि भारत रूसी तेल कम खरीद रहा है,” ग्राहम ने कहा। उन्होंने जोड़ा कि भारतीय दूत ने उनसे कहा, “क्या आप राष्ट्रपति से कहेंगे कि टैरिफ में राहत दी जाए?” ग्राहम के दावे पर भारतीय अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
पिछले महीने भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने वॉशिंगटन डीसी में अपने आधिकारिक आवास ‘इंडिया हाउस’ में ग्राहम सहित कई अमेरिकी सीनेटरों की मेजबानी की थी।
ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जो दुनिया में सबसे अधिक है, जिसमें रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत शुल्क शामिल है।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जिसे पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में बदला जाता है। 2021 तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी महज 0.2 प्रतिशत थी। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में सस्ता मिला, जिसे भारतीय रिफाइनरों ने तेजी से खरीदा।
रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स कंपनी क्लेर (Kpler) के अनुसार, दिसंबर में भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 12 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) रहने का अनुमान है, जो नवंबर में 18.4 लाख बीपीडी था। यह दिसंबर 2022 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
भारतीय रिफाइनर अब भी गैर-प्रतिबंधित संस्थाओं से रूसी कच्चा तेल खरीद रहे हैं। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत, फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा मॉस्को से दूरी बनाने पर रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था।
परंपरागत रूप से मध्य पूर्वी तेल पर निर्भर भारत ने रूसी आयात में तेजी से वृद्धि की, जिससे इसकी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत से भी कम से बढ़कर कुल आयात का करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई। दिसंबर में रूस भारत का शीर्ष आपूर्तिकर्ता बना रहा, लेकिन उसकी हिस्सेदारी नवंबर के लगभग एक-तिहाई से घटकर कुल आयात के एक-चौथाई से भी कम रह गई।
