
नई दिल्ली, 5 जनवरी (पीटीआई)
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश मामले में कार्यकर्ताओं गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत देते हुए उन पर 11 शर्तें लगाईं।
लगाई गई शर्तें इस प्रकार हैं:
- प्रत्येक अपीलकर्ता को ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि के अनुसार 2 लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि के दो स्थानीय जमानती प्रस्तुत करने होंगे।
- अपीलकर्ता राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली की सीमा के भीतर रहेंगे और ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना इसकी क्षेत्रीय सीमा से बाहर नहीं जाएंगे। यात्रा के लिए किसी भी अनुरोध में कारण बताने होंगे और ऐसे अनुरोध पर ट्रायल कोर्ट उसके गुण-दोष के आधार पर सख्ती से विचार करेगा।
- अपीलकर्ता अपने पासपोर्ट (यदि कोई हो) ट्रायल कोर्ट के समक्ष जमा करेंगे। यदि पासपोर्ट नहीं है तो इस संबंध में हलफनामा दाखिल करेंगे। शीर्ष अदालत ने प्रतिवादी को निर्देश दिया कि देश के सभी आव्रजन अधिकारियों को सूचित किया जाए कि ट्रायल कोर्ट की अनुमति के बिना किसी भी तरह से उन्हें देश छोड़ने की अनुमति न दी जाए।
- अपीलकर्ता अपने वर्तमान आवासीय पते, संपर्क नंबर और ई-मेल पते जांच अधिकारी और ट्रायल कोर्ट को उपलब्ध कराएंगे। वे कम से कम सात दिन की पूर्व लिखित सूचना दिए बिना अपना पता या संपर्क विवरण नहीं बदलेंगे।
- प्रत्येक अपीलकर्ता—गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—सप्ताह में दो बार, यानी सोमवार और गुरुवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच, पुलिस मुख्यालय, जय सिंह मार्ग, नई दिल्ली स्थित क्राइम ब्रांच थाना के थाना प्रभारी (SHO) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी हाजिरी लगाएंगे।
- SHO प्रत्येक अपीलकर्ता के लिए अलग-अलग उपस्थिति रजिस्टर बनाए रखेगा और मासिक अनुपालन रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट को देगा, जिसे मामले के मुख्य रिकॉर्ड में रखा जाएगा।
- उपरोक्त अपीलकर्ता किसी भी गवाह या कार्यवाही से जुड़े किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क, प्रभाव, धमकी या संपर्क का प्रयास नहीं करेंगे, न ही वर्तमान FIR/अंतिम रिपोर्ट के विषय से जुड़े किसी समूह या संगठन की गतिविधियों से जुड़ेंगे या उसमें भाग लेंगे।
- अपीलकर्ता ट्रायल की समाप्ति तक इस मामले या इसके प्रतिभागियों से संबंधित कोई भी जानकारी, बयान, लेख या पोस्ट प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया पर प्रकाशित या प्रसारित नहीं करेंगे।
- अपीलकर्ता ट्रायल की समाप्ति तक किसी भी कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे और न ही किसी सभा, रैली या बैठक को—चाहे वह भौतिक रूप से हो या वर्चुअल—संबोधित करेंगे या उसमें शामिल होंगे।
- अपीलकर्ता किसी भी रूप में—इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक—कोई पोस्ट, हैंडबिल, पोस्टर, बैनर आदि का प्रसार नहीं करेंगे।
- अपीलकर्ता ट्रायल में पूर्ण सहयोग करेंगे और ट्रायल कोर्ट द्वारा दर्ज कारणों से छूट दिए जाने को छोड़कर हर सुनवाई की तारीख पर उपस्थित रहेंगे। वे ऐसा कोई आचरण नहीं करेंगे जिससे कार्यवाही में देरी हो।
- अपीलकर्ता पूरे समय शांति और अच्छा आचरण बनाए रखेंगे। यदि ट्रायल के दौरान कोई अपराध होता है तो अभियोजन पक्ष को जमानत रद्द करने के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी और ऐसे आवेदन पर ट्रायल कोर्ट उसके गुण-दोष के आधार पर विचार करेगा।
