
नई दिल्ली, 5 जनवरी (भाषा) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 से 2025 के बीच लाल किले से दिए गए भाषणों का एक उर्दू संकलन ‘खुतबत-ए-मोदीः लाल किला की फसील से’ पुस्तक का विमोचन किया।
यह पुस्तक राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (एनसीपीयूएल) द्वारा प्रकाशित की गई है, जो शिक्षा मंत्रालय के तहत एक राष्ट्रीय संस्थान है, जो देश भर में उर्दू भाषा को बढ़ावा देने, संरक्षित करने और प्रचार करने के लिए अनिवार्य है।
सभा को संबोधित करते हुए प्रधान ने इसे भाषाई समावेश की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उन्होंने कहा कि अंत्योदय (अंतिम व्यक्ति का उत्थान), गरीबों का कल्याण, स्वच्छ भारत, राष्ट्रीय एकता और 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं जैसी पहलों पर प्रधानमंत्री के संबोधन में जोर दिया गया है, जो नए भारत के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
“इस तरह के प्रकाशन नागरिकों को प्रधानमंत्री के विचारों, विकासात्मक प्राथमिकताओं और दृष्टि से सीधे जोड़ने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में काम करते हैं, जिससे व्यापक सार्वजनिक जुड़ाव और सूचित प्रवचन को सक्षम बनाया जा सकता है। मुझे उम्मीद है कि इस पुस्तक को देश भर के पुस्तकालयों में जगह मिलेगी, जो छात्रों, विद्वानों और पाठकों को विकसित भारत के दृष्टिकोण पर व्यापक संवाद में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि एनसीपीयूएल को उर्दू में भारत की विरासत, संस्कृति, जीवन शैली और ज्ञान परंपराओं से संबंधित कार्यों को प्रकाशित करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। पीटीआई जीजेएस जीजेएस केएसएस केएसएस
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