नई दिल्ली, 6 जनवरी (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 27,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में अमटेक ग्रुप के पूर्व चेयरपर्सन अरविंद धाम को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें धाम को जमानत देने से इनकार किया गया था।
न्यायमूर्ति अराधे, जो न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ में शामिल थे, ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत ने इस मामले में अरविंद धाम की अपील स्वीकार कर ली है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले साल 19 अगस्त को धाम को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि समय से पहले रिहाई जवाबदेही तय करने के प्रयासों को कमजोर कर सकती है।
हाईकोर्ट ने कहा था, “तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास के साथ मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध देश की वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। ऐसे अपराधों की जांच एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इनमें जटिल लेन-देन और कई पक्षों की संलिप्तता होती है।”
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है, ताकि निर्दोष लोगों को गलत तरीके से फंसाया न जाए और वास्तविक दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।
अदालत के अनुसार, “मामले की जटिलता, अनेक लेन-देन और परतदार कॉरपोरेट ढांचे के कारण मुकदमे की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।”
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि आर्थिक अपराधों में जमानत के मामलों में सख्ती का सिद्धांत पूर्ण नहीं है, लेकिन “बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में अपराध की गंभीरता सर्वोपरि हो जाती है।”
अदालत ने कहा था कि ऐसे अपराध अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव डालते हैं, सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करते हैं और जमाकर्ताओं व लेनदारों को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे मामलों में उदारता से जमानत देना न्याय व्यवस्था पर जनता के भरोसे को चोट पहुंचा सकता है।
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन रोकथाम कानून के तहत दिवालिया ऑटोमोटिव उपकरण निर्माता अमटेक ग्रुप की कंपनियों की 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं।
ईडी ने अमटेक ऑटो लिमिटेड, एआरजी लिमिटेड, एसीआईएल लिमिटेड, मेटालिस्ट फोर्जिंग लिमिटेड, कास्टेक्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और अमटेक ग्रुप के प्रमोटर अरविंद धाम समेत अन्य के खिलाफ कार्रवाई की थी।
सितंबर 2024 में एजेंसी ने कुल 5,115.31 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की थीं।
ईडी की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 27 फरवरी 2024 को धन शोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत शुरू हुई थी।
अरविंद धाम को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया गया था और सितंबर 2024 में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
जांच में पाया गया कि इन कंपनियों को दिवालिया प्रक्रिया में ले जाया गया, जिसके समाधान के बाद बैंकों को 80 प्रतिशत से अधिक का ‘हेयरकट’ सहना पड़ा, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भारी नुकसान हुआ।
ईडी ने आरोप लगाया कि समूह की कंपनियों के वित्तीय विवरणों में धोखाधड़ी कर अतिरिक्त फर्जी ऋण लिए गए और खातों में नकली संपत्तियां और निवेश दिखाए गए।
अस्थायी रूप से कुर्क की गई संपत्तियों में राजस्थान और पंजाब में 145 एकड़ जमीन, दिल्ली-एनसीआर की करीब 342 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां, साथ ही 112.5 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक बैलेंस शामिल हैं।
ईडी के अनुसार, अमटेक की सभी संपत्तियां “अपराध से प्राप्त प्रत्यक्ष आय” हैं, जिन्हें अरविंद धाम के स्वामित्व वाली विभिन्न कंपनियों के माध्यम से रखा गया था, साथ ही उन बैंकों के पास मौजूद संपत्तियां भी शामिल हैं जिन्होंने ऋण स्वीकृत किए थे।
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