मुस्ताफिज़ुर को मुआवज़ा मिलने की संभावना नहीं

**EDS: FILE IMAGE** New Delhi: In this Sunday, May 18, 2025 file photo, Delhi Capitals' Mustafizur Rahman during an IPL 2025 cricket match, in New Delhi. The BCCI has asked Kolkata Knight Riders to release the Bangladesh pacer from its squad ahead of the Indian Premier League's 2026 edition amid the growing strain in bilateral ties between the two countries, on Saturday, Jan. 3, 2026. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI01_03_2026_000051B) *** Local Caption ***

कोलकाता, 6 जनवरी (पीटीआई) बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्ताफिज़ुर रहमान को आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) द्वारा अनुबंध समाप्त किए जाने के बाद किसी भी तरह का वित्तीय मुआवज़ा मिलने की संभावना बेहद कम है। यह फैसला बीसीसीआई के निर्देश पर लिया गया, जबकि इस पूरे घटनाक्रम में मुस्ताफिज़ुर की कोई भूमिका नहीं थी।

मुस्ताफिज़ुर को आईपीएल नीलामी में केकेआर ने 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। इस बोली में चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स भी शामिल थीं। हालांकि, भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने इस फैसले के पीछे ठोस कारण नहीं बताए और केवल इतना कहा कि यह कदम “चारों ओर हो रहे घटनाक्रम” के चलते उठाया गया।

इस फैसले के जवाब में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने अपने टी20 विश्व कप मुकाबलों को भारत से श्रीलंका स्थानांतरित करने की मांग की है।

हालांकि, इस पूरे मामले ने खिलाड़ियों के अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है—खासतौर पर इसलिए क्योंकि न तो मुस्ताफिज़ुर ने खुद टूर्नामेंट से नाम वापस लिया था और न ही उन पर किसी तरह के अनुशासनहीनता के आरोप हैं—लेकिन सूत्रों के मुताबिक मौजूदा बीमा व्यवस्था में उन्हें मुआवज़ा देने की कोई स्पष्ट गुंजाइश नहीं है।

आईपीएल से जुड़े एक सूत्र ने बताया, “आईपीएल के सभी खिलाड़ियों की सैलरी का बीमा होता है। विदेशी खिलाड़ियों के मामले में आमतौर पर फ्रेंचाइज़ी तभी भुगतान करती है, जब खिलाड़ी टीम से जुड़ने के बाद या टूर्नामेंट के दौरान घायल हो जाए। ऐसे मामलों में लगभग 50 प्रतिशत राशि बीमा से मिलती है। भारत के केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों के लिए स्थिति बेहतर होती है, क्योंकि उन्हें बीसीसीआई भुगतान करता है।”

हालांकि, मुस्ताफिज़ुर का मामला इन मानक बीमा शर्तों में नहीं आता। चूंकि उनका रिलीज़ होना न तो चोट के कारण था और न ही किसी क्रिकेटिंग वजह से, इसलिए केकेआर पर उन्हें भुगतान करने की कोई संविदात्मक बाध्यता नहीं बनती।

सूत्र ने कहा, “बीमा दावे के लिहाज़ से यह स्थिति कवर नहीं होती, इसलिए केकेआर पर एक पैसा देने की भी कोई आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन मुस्ताफिज़ुर के पास कानूनी रास्ते के अलावा कोई खास विकल्प नहीं बचता—और वह भी भारतीय कानून के दायरे में आता है। कोई भी विदेशी खिलाड़ी ऐसी प्रक्रिया में नहीं पड़ना चाहेगा या कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) का रुख नहीं करेगा।”

बीसीबी द्वारा मुस्ताफिज़ुर का आईपीएल खेलने के लिए जारी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) वापस लेने से भी उनकी स्थिति और कमजोर हो गई है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी कानूनी कार्रवाई से रोकने वाला बड़ा कारण हैं।

“भारत-बांग्लादेश के राजनीतिक संबंध भारत-पाकिस्तान जैसे स्थिर नहीं हैं। हालात अगले साल बदल भी सकते हैं, ऐसे में कोई कानूनी जोखिम क्यों ले,” सूत्र ने कहा।

फिलहाल स्थिति यह है कि भारी रकम में खरीदे जाने और किसी भी तरह की पेशेवर या अनुशासनात्मक चूक न होने के बावजूद, मुस्ताफिज़ुर रहमान को बिना किसी मुआवज़े के ही बाहर होना पड़ सकता है। यह मामला खेल से इतर राजनीतिक और प्रशासनिक कारणों से पैदा हुई परिस्थितियों में खिलाड़ियों की सुरक्षा की सीमाओं को उजागर करता है।

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