नई दिल्ली, 6 जनवरी (पीटीआई) दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव की उस याचिका पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा, जिसमें उन्होंने कथित IRCTC घोटाला मामले में उनके खिलाफ आरोप तय किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने तेजस्वी यादव की याचिका और स्थगन आवेदन पर CBI को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 जनवरी को तय की। इसी दिन उनके पिता और RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की इसी तरह की याचिका पर भी सुनवाई होगी।
इससे पहले, 5 जनवरी को हाईकोर्ट ने लालू यादव की याचिका पर भी CBI से जवाब मांगा था, हालांकि अदालत ने CBI का पक्ष सुने बिना ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
इस बीच, न्यायमूर्ति शर्मा ने सह-आरोपी और लालू यादव के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) भोला यादव की याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह मामला अब 8 जनवरी को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।
13 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव और 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश, साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध करने के आरोप हैं।
तेजस्वी यादव, जो बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री हैं, और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने ट्रायल कोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामला IRCTC के दो होटलों — पुरी और रांची — के संचालन से जुड़े ठेकों में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।
CBI की चार्जशीट के अनुसार, वर्ष 2004 से 2014 के बीच एक कथित साजिश रची गई, जिसके तहत भारतीय रेलवे के BNR होटल पहले IRCTC को स्थानांतरित किए गए और बाद में इनके संचालन, रखरखाव और प्रबंधन का ठेका बिहार के पटना स्थित सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया।
एजेंसी का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर की गई और शर्तों को इस तरह बदला गया ताकि एक निजी कंपनी सुजाता होटल्स को फायदा पहुंचाया जा सके।
चार्जशीट में IRCTC के तत्कालीन ग्रुप जनरल मैनेजर वी. के. आस्थाना और आर. के. गोयल के अलावा सुजाता होटल्स के निदेशक विजय कोचर और विनय कोचर (चाणक्य होटल के मालिक) के नाम भी शामिल हैं। डिलाइट मार्केटिंग कंपनी, जिसे अब लारा प्रोजेक्ट्स के नाम से जाना जाता है, और सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपी कंपनियों के रूप में नामित किया गया है।
ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस मामले में भूमि और शेयर से जुड़े लेनदेन “रेलवे के पुरी और रांची होटलों में निजी भागीदारी के नाम पर पनपे संभावित क्रोनी कैपिटलिज्म का उदाहरण” हो सकते हैं।
अदालत ने लालू यादव सहित कई आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d)(ii) और (iii) के तहत आरोप तय किए थे। इसके अलावा, IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120B (आपराधिक साजिश) के तहत भी सामूहिक आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अधिकतम सजा 10 साल और धोखाधड़ी के मामले में सात साल तक की सजा का प्रावधान है।
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