अहमदाबाद, 7 जनवरी (PTI) — भारत 2040 तक अपने अंतरिक्षयात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की योजना बना रहा है, यह जानकारी पूर्व इसरो प्रमुख ए.एस. किरण कुमार ने बुधवार को दी।
कुमार, जो वर्तमान में फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी (PRL) के प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष हैं, 5वें एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (ASI) संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, “अब से 2040 तक कई मिशन अंतरिक्ष गतिविधियों में जाएंगे। 2040 तक हम भारतीयों को चंद्रमा पर उतारने और सुरक्षित वापस लाने की योजना बना रहे हैं। भारत 2040 तक एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।”
PRL परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कुमार ने देश की अंतरिक्ष योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में चंद्रयान फॉलो-ऑन मिशन होगा और जापान के साथ मिलकर लैंडर और रोवर पर काम चल रहा है।
कुमार ने कहा, “हमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में विशेष जानकारी तलाशनी चाहिए। यह केवल कई गतिविधियों की शुरुआत होगी। भारत अंतरिक्ष अवलोकन और ब्रह्मांड की समझ के प्रति प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने यह भी बताया कि यह योजना शैक्षणिक संस्थानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष अन्वेषण में योगदान के अवसर खोलेगी।
अपने उद्घाटन भाषण में कुमार ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने मुख्य रूप से सामाजिक लाभ के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का निर्माण शुरू किया, न कि सैन्य उद्देश्यों के लिए।
उन्होंने डॉ. विक्रम साराभाई के योगदान को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के केवल 10 वर्ष बाद भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र का विकास उनके प्रयासों से संभव हुआ। साराभाई ने दिखाया कि कैसे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी प्रसारण संचार और मौसम निगरानी में सुधार कर नागरिकों को सुविधा प्रदान कर सकती है।
तीन दिन के संगोष्ठी में खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, ग्रह विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान और क्वांटम विज्ञान व तकनीक जैसी नई अंतरविषयक शाखाओं में ऑप्टिक्स और उन्नत उपकरणों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इसमें लगभग 150 वैज्ञानिक, इंजीनियर, अकादमिक, युवा शोधकर्ता और उद्योग प्रतिनिधि शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में प्रो. यशवंत गुप्ता (नैशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स), प्रो. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स, बेंगलुरु), और प्रो. अनिल भारद्वाज (फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी) उपस्थित थे।
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