
नई दिल्ली, 8 जनवरी (पीटीआई)
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण लोकतंत्र में नेतृत्व को सहानुभूति, संवाद और सत्यनिष्ठा में निहित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं केवल नियमों और प्रक्रियाओं से ही नहीं, बल्कि विश्वास से भी फलती-फूलती हैं।
वे यहां “सिंग, डांस एंड लीड: श्रील प्रभुपाद के जीवन से नेतृत्व के सबक” शीर्षक पुस्तक के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।
सभा को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने मूल्यों, सेवा और नैतिक स्पष्टता पर आधारित नेतृत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि स्वामी प्रभुपाद ने आनंदपूर्ण, सहभागी और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया, जो पीढ़ियों से लोगों को प्रेरित करता आ रहा है।
इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अक्षय पात्र फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा इस्कॉन-बेंगलुरु के अध्यक्ष मधु पंडित दास और अक्षय पात्र फाउंडेशन के उपाध्यक्ष, सह-संस्थापक एवं इस्कॉन-बेंगलुरु के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंचलपति दास भी उपस्थित थे।
पीटीआई एनएबी आरसी
