मुंबई, 8 जनवरी (पीटीआई) कांग्रेस ने गुरुवार को कहा कि अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी के साथ गठबंधन करने पर उसने अपने पार्षदों को निलंबित कर दिया, लेकिन गठबंधन की पहल करने वाले अपने नेताओं के खिलाफ बीजेपी ने कोई कार्रवाई नहीं की, जो उसके दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
20 दिसंबर को हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद बीजेपी ने अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ (एवीए) के बैनर तले हाथ मिलाकर (ठाणे जिले में) अंबरनाथ नगर परिषद का नेतृत्व गठित किया। इस गठबंधन में अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) भी शामिल है। इस व्यवस्था में सहयोगी शिवसेना को दरकिनार कर दिया गया, जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
इस असहज गठबंधन से असहज हुई कांग्रेस ने बुधवार को अपने 12 नव-निर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया।
महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण के अनुसार, निलंबित किए गए 12 पार्षद बुधवार देर रात बीजेपी में शामिल हो गए।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ की बात करने वाली बीजेपी ने अपने “पाखंड और दोहरे मापदंड” को उजागर कर दिया है, क्योंकि यह सामने आने के बावजूद कि एवीए बनाने का प्रस्ताव खुद बीजेपी की ओर से आया था, उसने अपने पार्षदों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के साथ बीजेपी के गठबंधन पर सावंत ने स्वतंत्रता-पूर्व काल से तुलना करते हुए कहा कि उस समय हिंदू महासभा ने कई क्षेत्रों में मुस्लिम लीग के साथ सत्ता साझा की थी।
उन्होंने आरोप लगाया, “यह एक बार फिर साबित करता है कि चरमपंथी ताकतों के एजेंडे एक-दूसरे के पूरक होते हैं।”
सावंत ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से यह दावा करती रही है कि बीजेपी और एआईएमआईएम पर्दे के पीछे साथ काम करती हैं और अब उनकी राजनीतिक नजदीकियां खुलकर सामने आ गई हैं।
उन्होंने कहा, “लोग अब समझ चुके हैं कि ध्रुवीकरण किस तरह जानबूझकर रचा जाता है,” और आरोप लगाया कि सत्ता के लिए बीजेपी सिद्धांतों, नैतिकता और विचारधारा से समझौता करने को तैयार रहती है।
उधर, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने अकोट नगर परिषद में एआईएमआईएम के साथ गठबंधन को लेकर अपनी पार्टी के अकोट विधायक प्रकाश भरसाखले को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
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