
नई दिल्ली, 8 जनवरी (PTI) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गुरुवार से शुरू हो रहा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया।
यह वर्षभर चलने वाला आयोजन भारतीय सभ्यता की उस दृढ़ता और जीवटता का प्रतीक है, जिसने बार-बार विदेशी आक्रमणों से क्षतिग्रस्त हुए गुजरात के वेरावल स्थित सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण किया।
प्रधानमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा,
“जय सोमनाथ! आज से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की शुरुआत हो रही है। एक हजार वर्ष पहले, जनवरी 1026 में सोमनाथ पर पहला आक्रमण हुआ था। 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए हमले न तो करोड़ों श्रद्धालुओं की शाश्वत आस्था को कमजोर कर सके और न ही उस सभ्यतागत चेतना को तोड़ पाए, जिसने बार-बार सोमनाथ का पुनर्निर्माण किया।”
प्रधानमंत्री 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं।
मोदी ने सोमनाथ की अपनी पूर्व यात्राओं की कुछ तस्वीरें भी साझा कीं और लोगों से आग्रह किया कि वे #SomnathSwabhimanParv हैशटैग के साथ अपनी तस्वीरें साझा करें।
उन्होंने कहा,
“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व उन असंख्य भारत माता के सपूतों को याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न रही हों, उनका संकल्प अडिग रहा और हमारे सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कभी कमजोर नहीं पड़ी।”
प्रधानमंत्री ने 31 अक्टूबर 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की झलकियां भी साझा कीं, जो पुनर्निर्मित मंदिर के 1951 में उद्घाटन के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुआ था। यह उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में किया गया था।
मोदी ने कहा,
“सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल, के.एम. मुंशी और अनेक अन्य महान व्यक्तियों के प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे। 2001 के कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल जी, गृह मंत्री आडवाणी जी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।”
उन्होंने आगे कहा,
“2026 में हम 1951 में हुए उस भव्य समारोह के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाएंगे।”
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