दिल्ली दंगे मामला: जमानत मिलने वाले पांचवें आरोपी की रिहाई के आदेश जारी

New Delhi: Security heightened outside the Supreme Court, in New Delhi, Monday, Jan. 5, 2026. Supreme Court on Monday refused to grant bail to activists Umar Khalid and Sharjeel Imam in the 2020 Delhi riots conspiracy matter, saying there was a prima facie case against them under the Unlawful Activities (Prevention) Act. (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI01_05_2026_000101B)

नई दिल्ली, 8 जनवरी (पीटीआई) — दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाने वाले पांच आरोपियों में से पांचवें आरोपी शहदाब अहमद की रिहाई के आदेश जारी कर दिए।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बजपाई ने 2 लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो स्थानीय जमानतदारों को स्वीकार करते हुए आरोपी की रिहाई का आदेश दिया। यह आदेश दिल्ली पुलिस द्वारा सभी जमानतदारों और आरोपी द्वारा दाखिल दस्तावेजों के सत्यापन की रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने के बाद जारी किया गया।

अदालत ने कहा कि आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई सभी जमानत शर्तों का पालन किया है। इससे पहले बुधवार को अदालत ने दिल्ली पुलिस को दस्तावेजों और जमानतदारों के सत्यापन का निर्देश दिया था।

इससे पहले, अन्य चार आरोपी बुधवार को जेल से रिहा हो गए थे, जब अदालत ने उनके रिहाई आदेश जारी किए थे।

सोमवार को शीर्ष अदालत ने कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था, जबकि पांच अन्य आरोपियों को जमानत दी थी। अदालत ने कहा था कि सभी आरोपियों की भूमिका समान नहीं है और भागीदारी के स्तर में अंतर है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा था कि खालिद और इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

सुप्रीम कोर्ट ने पांच आरोपियों को जमानत देते समय 11 शर्तें लगाई थीं और कहा था कि शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में ट्रायल कोर्ट सुनवाई के बाद जमानत रद्द कर सकती है। अदालत ने आरोपियों को 2 लाख रुपये का निजी मुचलका और समान राशि के दो स्थानीय जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली की सीमा में ही रहने और ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना क्षेत्र छोड़ने से भी रोका। यात्रा के लिए आवेदन करने पर कारण बताना अनिवार्य होगा और ट्रायल कोर्ट उस पर मेरिट के आधार पर निर्णय करेगा।

इसके अलावा, अदालत ने आरोपियों को अपने पासपोर्ट जमा करने और जांच अधिकारी तथा ट्रायल कोर्ट को अपना वर्तमान आवासीय पता, संपर्क नंबर और ई-मेल पता देने का निर्देश दिया। आरोपियों के वकीलों ने विवरण जमा करने के लिए तीन से चार दिन का समय मांगा, यह कहते हुए कि लंबे समय से उनके मोबाइल फोन सक्रिय नहीं थे।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी किसी भी गवाह या मामले से जुड़े किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क, प्रभाव, धमकी या संपर्क करने का प्रयास नहीं करेंगे और न ही वर्तमान एफआईआर से जुड़े किसी समूह या संगठन की गतिविधियों से जुड़ेंगे।