जे-के सरकार प्रभावित मेडिकल छात्रों को सुपरन्यूमरेरी सीटों के ज़रिए समायोजित करेगी: सीएम उमर अब्दुल्ला

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image received on Dec. 17, 2025, Jammu and Kashmir Chief Minister Omar Abdullah in a conversation with Indian Express National Opinion Editor Vandita Mishra, unseen, during the Express Adda, New Delhi. (Handout via PTI Photo) (PTI12_17_2025_000687B)

जम्मू, 8 जनवरी (पीटीआई) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा कि मेडिकल कॉलेज के बंद होने से प्रभावित छात्रों को अन्य मेडिकल संस्थानों में सुपरन्यूमेररी सीटें देकर समायोजित किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनकी पढ़ाई पर कोई असर न पड़े।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

सुपरन्यूमेररी सीटें वे अतिरिक्त सीटें होती हैं, जो किसी अधिकृत संस्था द्वारा स्वीकृत सीटों से अधिक बनाई जाती हैं।

संवाददाताओं से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, “स्वास्थ्य मंत्री मेरे साथ मौजूद हैं। कल वह मेरे साथ सांबा में थीं। हमने इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की है। ये छात्र वैध तरीके से नीट परीक्षा पास कर चुके हैं और मेरिट के आधार पर चयनित हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “इन छात्रों को समायोजित करना हमारी कानूनी जिम्मेदारी है। हम उनके घरों के नजदीक स्थित मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमेररी सीटें बनाकर उन्हें एडजस्ट करेंगे, ताकि उनकी शिक्षा प्रभावित न हो।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को समायोजित करना कोई कठिन काम नहीं है। “हम यह जरूर करेंगे,” उन्होंने दोहराया।

हालांकि, उन्होंने मेडिकल कॉलेज बंद किए जाने से छात्रों के भविष्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा, “आज 50 सीटों में से 40 सीटें मुस्लिम छात्रों ने लीं और इस पर आपत्तियां उठीं। लेकिन यदि समय के साथ इस कॉलेज की सीटें बढ़कर 400–500 हो जातीं, तो भविष्य में 250–300 छात्र जम्मू से भी होते। अब वे छात्र कहां जाएंगे?”

जम्मू में भाजपा और अन्य संगठनों पर निशाना साधते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि देशभर में छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए कड़ा संघर्ष करते हैं।

उन्होंने कहा, “शायद हम ही एकमात्र जगह हैं, जहां पूरी तरह तैयार मेडिकल कॉलेज मिला और फिर विरोध के कारण उसे बंद करा दिया गया।”

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के निरीक्षणों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पूछा जाना चाहिए कि निरीक्षण किसने किया और कॉलेज को मंजूरी कैसे दी गई।

उन्होंने कहा, “विश्वविद्यालय और उसके शीर्ष पदाधिकारियों से लेकर नीचे तक सभी से सवाल किए जाने चाहिए—मेडिकल कॉलेज बनने के बाद वह निरीक्षण में पास क्यों नहीं हो सका?”

एनएमसी के इस दावे पर कि मानकों का पालन नहीं किया गया, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। “इस विश्वविद्यालय का प्रमुख और इसका चांसलर कौन है, उनसे भी सवाल पूछे जाने चाहिए। केवल मुझसे सवाल करना पर्याप्त नहीं है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने दोहराया कि यदि मानकों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। “हम इन 50 छात्रों को समायोजित कर देंगे, लेकिन छात्रों के भविष्य को जो नुकसान हुआ है, उसका जवाब किसी न किसी को देना होगा,” उन्होंने कहा।

संस्थान को दी गई वित्तीय सहायता वापस लेने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, “सहायता विश्वविद्यालय को दी गई थी। हम पैसे देकर उसे वापस लेने वाले लोग नहीं हैं।”

बेरोजगारी और इस आलोचना पर कि वह ज्यादा बोलते हैं, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने कभी किसी मुद्दे पर चुप्पी नहीं साधी।

उन्होंने कहा, “बताइए ऐसा कौन सा मुद्दा है जिस पर मैं चुप रहा हूं? विधानसभा सत्र आने वाला है, वहां सवाल उठाइए, हम जवाब देंगे।”

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