नई दिल्ली, 8 जनवरी (पीटीआई)
दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को कहा कि तुर्कमान गेट के पास स्थित फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद को कथित तौर पर तोड़े जाने की अफ़वाह फैलाने में कई व्हाट्सऐप समूहों पर प्रसारित भ्रामक ऑडियो संदेशों की अहम भूमिका रही। हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने इस झूठी कहानी का तुरंत खंडन करने के लिए त्वरित कार्रवाई की।
मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात दिल्ली के रामलीला मैदान इलाके में मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान हिंसा भड़क गई, जब बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिस कर्मियों पर पथराव किया। इस घटना में इलाके के थानाध्यक्ष सहित पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
इस मामले में कुल 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार, नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) द्वारा मस्जिद गिराए जाने का दावा करने वाली अफ़वाहें मुख्य रूप से अदालत के आदेश पर चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान से पहले समुदाय, धार्मिक और पड़ोस से जुड़े व्हाट्सऐप समूहों में साझा किए गए वॉयस नोट्स के जरिए फैलीं।
जांचकर्ताओं ने बताया कि ऑडियो संदेशों के प्रसार से पहले ही कई व्हाट्सऐप समूह पुलिस की निगरानी में थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा,
“हमारी टीमों ने इन समूहों में घुसपैठ कर ली थी और सक्रिय रूप से झूठे दावों का खंडन किया। इससे भीड़ के आकार को सीमित रखने और बड़े स्तर पर जुटान को रोकने में मदद मिली।”
पुलिस के अनुसार, करीब चार से पांच व्हाट्सऐप समूह, जिनका रुख आक्रामक या भड़काऊ था, पर कड़ी निगरानी रखी गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि घटना से ठीक पहले कोई नए समूह बनाए जाने के संकेत नहीं मिले हैं, हालांकि यह पहलू जांच के दायरे में है कि क्या अफ़वाहें पहले से सुनियोजित थीं।
अधिकारी ने कहा,
“जैसे ही गलत जानकारी सामने आई, हमारे एसीपी और एसएचओ ने अमन कमेटी के सदस्यों, समुदाय के बुजुर्गों और धार्मिक नेताओं से संपर्क कर स्पष्ट किया कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।” उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं मौलवियों से बातचीत कर भय को दूर करने का प्रयास किया।
केंद्रीय जिले के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त निधिन वलसन ने अभियान से कुछ दिन पहले ही 120 से अधिक मौलवियों के साथ बैठक की थी, जिसमें साफ तौर पर बताया गया था कि केवल अवैध अतिक्रमण हटाए जाएंगे और मस्जिद इस कार्रवाई का हिस्सा नहीं है।
धार्मिक नेताओं को यह भी बताया गया कि यदि वे अदालत के आदेश को चुनौती देना चाहते हैं तो उनके पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
पुलिस ने कम से कम 10 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की पहचान की है, जिन पर मस्जिद गिराए जाने के झूठे दावे फैलाने का आरोप है। इनमें से एक महिला इन्फ्लुएंसर को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि प्रसारित किया गया कंटेंट भ्रामक था और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की क्षमता रखता था।
(पीटीआई) एसएसजे एसएसजे एनएसडी एनएसडी
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