
नई दिल्ली, 9 जनवरी (पीटीआई) – यह सब जैसे किस्मत में लिखा था, ऐसा मानते हैं उनके पिता।
क्रिकेट का बल्ला हाथ में लेने से बहुत पहले ही वैष्णवी शर्मा का भविष्य तय हो चुका था — कम से कम उनके ज्योतिषी पिता नरेंद्र शर्मा का तो यही विश्वास था।
ग्वालियर की 20 वर्षीय बाएं हाथ की स्पिनर वैष्णवी शर्मा ने पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए पदार्पण किया।
‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में वैष्णवी ने कहा,
“जब मैं चार साल की थी, तब से ही मेरा खेलों से जुड़ाव शुरू हो गया था। जैसा कि आप जानते हैं, मेरे पिता ज्योतिषी हैं। उन्होंने मेरी कुंडली देखकर कहा था कि मुझे या तो खेलों में जाना चाहिए या फिर मेडिकल फील्ड में।”
उन्होंने आगे कहा,
“इसके बाद सवाल यह था कि मेरी खुद की रुचि किसमें है। कुछ समय बाद उन्हें समझ आ गया कि मेरी दिलचस्पी खेलों में है। सात साल की उम्र में मैंने शाम की प्रैक्टिस शुरू की और क्रिकेट को गंभीरता से खेलने लगी।”
“जब मैं 11–12 साल की थी, तब मैंने मध्य प्रदेश के लिए अपना पहला अंडर-16 मैच खेला। तब वह बीसीसीआई के अंतर्गत नहीं था, लेकिन वहीं से मेरे सफर की असली शुरुआत हुई,” वैष्णवी ने याद किया।
श्रीलंका के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में वह भारत की ओर से संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज रहीं, उनके खाते में पांच विकेट आए। वैष्णवी का कहना है कि क्रिकेट को लेकर उनका लक्ष्य पहले दिन से बिल्कुल साफ था।
“जब मैंने क्रिकेट शुरू किया, तब से यही मेरा सपना था। मैंने कभी किसी और लक्ष्य पर ध्यान नहीं दिया। जब भी मैं मैदान पर जाती हूं, बाकी सब कुछ भूल जाती हूं, क्योंकि क्रिकेट खेलने के बाद जो एहसास मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता,” उन्होंने कहा।
“मैं घर पर खाली नहीं बैठ सकती। चाहे मैं अपनी पसंदीदा चीजें कर रही हूं, लेकिन क्रिकेट के प्रति जो प्यार है, उसके सामने कुछ और मायने नहीं रखता,” उन्होंने जोड़ा।
हालांकि उनका सफर आसान नहीं रहा। वैष्णवी ने माना कि महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) नीलामी में चयन न होने पर उन्हें निराशा हुई थी, खासकर जब उन्होंने श्रीलंका सीरीज से पहले इसकी उम्मीद की थी।
“जब उम्मीदें होती हैं और वे पूरी नहीं होतीं, तो बुरा तो लगता है। मुझे भी बहुत बुरा लगा था,” उन्होंने कहा।
“लेकिन उस समय मैं एक टूर्नामेंट खेल रही थी, इसलिए पूरा ध्यान अपनी टीम पर रखा। अंडर-23 टूर्नामेंट मेरे लिए बहुत बड़ा मंच था, इसलिए मैंने खुद को उसी पर केंद्रित रखा।”
उन्होंने कहा,
“फिर मैंने सोचा कि जो मेरे हाथ में है वही कर सकती हूं और बाकी भगवान पर छोड़ देती हूं। जब मैंने सब भगवान पर छोड़ा, तो उन्होंने मुझे उससे भी बेहतर चीज दी।”
घरेलू क्रिकेट पर फोकस बनाए रखने का नतीजा यह हुआ कि कुछ ही हफ्तों बाद उन्हें भारत की सीनियर टीम से बुलावा मिला। वैष्णवी के लिए वर्ल्ड कप विजेता खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना बेहद भावुक पल था।
“मैं बहुत नर्वस थी। सोच रही थी कि सबका रिएक्शन क्या होगा, बातचीत कैसे शुरू करूंगी। लेकिन वहां पहुंचते ही सभी ने बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया और मुझे सहज महसूस कराया। मैं सबके साथ जल्दी घुल-मिल गई,” उन्होंने कहा।
अब भले ही वह टीम इंडिया की खिलाड़ी हों, लेकिन कप्तान हरमनप्रीत कौर को लेकर उनका प्रशंसक भाव अब भी कायम है।
“हरमन दी से मिलने पर आज भी दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं। वे बड़े सितारे हैं। जिन्हें मैं टीवी पर देखा करती थी, आज उन्हीं के साथ खेल रही हूं। यह रोमांच हमेशा रहेगा,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
वैष्णवी ने बताया कि वह हरमनप्रीत के जुझारू स्वभाव और स्मृति मंधाना के खेल के प्रति नजरिए से प्रेरणा लेती हैं।
“स्मृति दी और हरमन दी मेरी रोल मॉडल हैं। स्मृति दी का एक इंटरव्यू मैंने देखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि चाहे वह टीम के लिए कितना भी योगदान दें, उस दिन को सेलिब्रेट करती हैं और अगले दिन फिर से शून्य से शुरुआत करती हैं। हरमन दी से मैंने कभी हार न मानने की सीख ली है,” उन्होंने कहा।
“सबसे अच्छी बात यह है कि जब भी हरमन दी मुझे गेंद देती हैं, तो कहती हैं – ‘खुलकर गेंदबाजी करो, अपना सर्वश्रेष्ठ दो और बल्लेबाज को नचाओ।’ पूरी टीम बहुत प्यारी है।”
गेंदबाजी के मामले में वैष्णवी को रविंद्र जडेजा और राधा यादव की सटीकता और नियंत्रण से प्रेरणा मिलती है।
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