
नई दिल्ली, 9 जनवरी (PTI) — राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल इस महीने के अंत में स्विट्ज़रलैंड के प्रसिद्ध पर्वतीय शहर डावोस में आयोजित होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की वार्षिक बैठक में शामिल होने वाले भारत के प्रभावशाली प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हो सकते हैं।
18 से 24 जनवरी तक चलने वाली पांच दिवसीय बैठक में भारत की ओर से कम से कम चार केंद्रीय मंत्री — अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान, प्रह्लाद जोशी और के. राम मोहन नायडू — के साथ छह राज्यों के मुख्यमंत्री और देश के 100 से अधिक शीर्ष उद्योगपति भाग लेने की उम्मीद है। इस वर्ष WEF बैठक की थीम ‘संवाद की भावना’ (A Spirit of Dialogue) रखी गई है।
डावोस पहुंचने वाले मुख्यमंत्रियों में महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, असम के हिमंता बिस्वा सरमा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, तेलंगाना के ए. रेवंत रेड्डी और झारखंड के हेमंत सोरेन शामिल हैं। इसके अलावा कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के भी बैठक में शामिल होने की संभावना है।
रेवंत रेड्डी कांग्रेस से हैं, हेमंत सोरेन कांग्रेस की सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा से और चंद्रबाबू नायडू तेलुगु देशम पार्टी (भाजपा की सहयोगी) से हैं, जबकि बाकी तीन मुख्यमंत्री भाजपा से जुड़े हैं। केंद्रीय मंत्रियों में राम मोहन नायडू टीडीपी से हैं, जबकि अन्य भाजपा के हैं।
इसके अलावा गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष रameshbhai संघवी और उत्तर प्रदेश का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस वैश्विक सम्मेलन में हिस्सा लेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भी बैठक में शामिल होने की संभावना है। उनके साथ ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। आने वाले दिनों में और वैश्विक नेताओं के नाम जुड़ने की उम्मीद है।
इस वैश्विक शिखर सम्मेलन में करीब 130 देशों से लगभग 3,000 नेता भाग लेंगे, जिनमें 60 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल होंगे — जो WEF के इतिहास में एक रिकॉर्ड संख्या है।
भारतीय प्रतिनिधि सम्मेलन के दौरान कई अहम पैनल चर्चाओं में हिस्सा लेंगे, जिनमें “क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है?” जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा द्विपक्षीय बैठकें और भारत-केंद्रित कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
भारतीय उद्योग जगत से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा समूह के एन. चंद्रशेखरन, बजाज समूह के संजीव बजाज, जूबिलेंट भारतीया समूह के हरि एस. भारतीया और टीवीएस मोटर के सुदर्शन वेणु के शामिल होने की उम्मीद है।
अन्य प्रमुख कॉरपोरेट नेताओं में एक्सिस बैंक के अमिताभ चौधरी, गोदरेज समूह के नादिर गोदरेज, जेएसडब्ल्यू समूह के सज्जन जिंदल, ज़ेरोधा के निखिल कामथ, भारती समूह के सुनील भारती मित्तल, इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि, सीईओ सलिल पारेख, विप्रो के ऋषद प्रेमजी, एस्सार के प्रशांत रूइया, पेटीएम के विजय शेखर शर्मा और रिन्यू के सुमंत सिन्हा शामिल हैं।
सरकारी क्षेत्र से DPIIT सचिव अमरदीप सिंह भाटिया, इंडियन ऑयल के चेयरमैन अरविंदर सिंह साहनी, गेल के संदीप कुमार गुप्ता, एसबीआई के चेयरमैन चल्ला श्रीनिवासुलु सेट्टी और आरईसी के जितेंद्र श्रीवास्तव भी डावोस पहुंचेंगे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ज़ुबिन ईरानी भी Alliance for Global Good: Gender Equity and Equality की संस्थापक और अध्यक्ष के रूप में सम्मेलन में भाग लेंगी, जिसकी स्थापना डावोस में ही हुई थी।
वैश्विक नेताओं में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा, आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा, यूरोपीय सेंट्रल बैंक प्रमुख क्रिस्टीन लगार्ड, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस, WTO प्रमुख न्गोज़ी ओकोंजो-इवेला और लंदन के मेयर सादिक खान शामिल हैं।
पाकिस्तान से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब और पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो ज़रदारी भी सम्मेलन में भाग लेंगे।
WEF के अनुसार, यह बैठक एक निष्पक्ष वैश्विक मंच के रूप में साझा चुनौतियों पर संवाद, नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी। सम्मेलन में पांच प्रमुख वैश्विक चुनौतियों — भू-राजनीतिक सहयोग, आर्थिक विकास, मानव संसाधन में निवेश, जिम्मेदार नवाचार और पर्यावरण-संतुलित समृद्धि — पर विशेष फोकस रहेगा।
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