गणतंत्र दिवस परेड के एयर शो के लिए आसमान को ‘ब्लैक काइट’ मुक्त रखने की दिल्ली सरकार की योजना, 1,275 किलो चिकन मीट से होगी पक्षियों की आवाजाही नियंत्रित

New Delhi: NCC cadets during a rehearsal for Republic Day parade, at Kartavya Path, in New Delhi, Friday, Jan. 9, 2026. (PTI Photo/Karma Bhutia)(PTI01_09_2026_000034B)

नई दिल्ली, 9 जनवरी (पीटीआई) गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान जब जेट और लड़ाकू विमान राष्ट्रीय राजधानी के आसमान में गर्जना करते नजर आएंगे, तब दिल्ली वन विभाग ने एक अनोखा उपाय अपनाने का फैसला किया है। विभाग ब्लैक काइट (चील) की आवाजाही को नियंत्रित करने और विमान मार्गों से उन्हें दूर रखने के लिए 1,270 किलोग्राम से अधिक बोनलेस चिकन मीट का इस्तेमाल करेगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के साथ समन्वय में हर साल एयर शो से पहले किया जाने वाला यह ‘मीट-थ्रोइंग’ अभ्यास पक्षियों से टकराव (बर्ड स्ट्राइक) को रोकने के उद्देश्य से किया जाता है, जो कम ऊंचाई पर उड़ान भरने वाले विमानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

अधिकारी ने कहा, “यह गणतंत्र दिवस के एयर शो से पहले किया जाने वाला वार्षिक एहतियाती अभ्यास है। ब्लैक काइट जैसे पक्षी स्वाभाविक रूप से खुले इलाकों और भोजन के स्रोतों की ओर आकर्षित होते हैं। यदि वे उड़ान गलियारे में प्रवेश कर जाएं, तो कम ऊंचाई पर करतब दिखाने वाले विमानों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।”

इस साल क्या अलग है, इस पर प्रकाश डालते हुए अधिकारी ने कहा कि विभाग ने इस बार चिकन मीट का उपयोग करने का निर्णय लिया है।

“पहले इस उद्देश्य के लिए भैंस का मांस इस्तेमाल किया जाता था। इस साल पहली बार चिकन मीट का उपयोग किया जाएगा। हमारा प्रयास वन्यजीव प्रबंधन और गणतंत्र दिवस समारोह के सुचारु आयोजन के बीच संतुलन बनाए रखने का है,” उन्होंने कहा।

यह अभ्यास 15 जनवरी से 26 जनवरी के बीच शहर के 20 स्थानों पर किया जाएगा। इनमें लाल किला और जामा मस्जिद जैसे संवेदनशील क्षेत्र भी शामिल हैं, जहां आमतौर पर चीलों की संख्या अधिक देखी जाती है।

अन्य स्थानों में मंडी हाउस, दिल्ली गेट और मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज़ के आसपास के इलाके भी शामिल हैं।

अधिकारी ने कहा, “इन स्थानों की पहचान हर साल पक्षियों की आवाजाही के पैटर्न के आधार पर की जाती है। लाल किला और जामा मस्जिद जैसे इलाकों में चीलों की संख्या अधिक होती है, जिससे उनके उड़ान मार्ग में भटकने का खतरा बढ़ जाता है। निर्धारित बिंदुओं पर उन्हें भोजन देकर हम यह सुनिश्चित करते हैं कि वे एयर शो मार्ग से दूर रहें और उन्हें पर्याप्त भोजन भी मिले।”

प्रक्रिया के बारे में बताते हुए अधिकारी ने कहा कि इसमें तय स्थानों पर हवा में चिकन मीट के छोटे-छोटे टुकड़े उछाले जाते हैं, ताकि पक्षी निचली ऊंचाई पर व्यस्त रहें और विमान मार्गों की ओर न उड़ें।

उन्होंने कहा, “यह अभ्यास आयोजन से करीब 15 दिन पहले तक बार-बार किया जाता है, जिससे पक्षी इस फीडिंग पैटर्न के आदी हो जाते हैं। उद्देश्य यह है कि गणतंत्र दिवस के एयर शो के दिन वे उड़ान मार्ग में न आएं और विमानों के लिए कोई खतरा न बनें।”

इस अभ्यास को सुचारु रूप से करने के लिए दिल्ली सरकार के वन एवं वन्यजीव विभाग ने बुधवार को 1,275 किलोग्राम बोनलेस चिकन मीट की आपूर्ति के लिए अल्पकालिक निविदा जारी की है।

निविदा दस्तावेज के अनुसार, मांस की आपूर्ति 15 से 25 जनवरी के बीच सात दिनों में की जाएगी। 15, 18, 19, 20, 23 और 25 जनवरी को 170-170 किलोग्राम, जबकि 22 जनवरी को 255 किलोग्राम मांस की आपूर्ति निर्धारित है। सभी खेपें वज़ीराबाद स्थित वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर में पहुंचाई जाएंगी।

प्रत्येक स्थान पर लगभग 20 किलोग्राम मांस का उपयोग किया जाएगा, जिससे सभी स्थानों पर प्रतिदिन कुल 200 से 400 किलोग्राम मांस खर्च होगा।

निविदा में यह भी उल्लेख है कि मांस 20 से 30 ग्राम के टुकड़ों में, पांच किलोग्राम के पैकेट में पैक कर आपूर्ति किया जाना चाहिए। दैनिक खेप की मात्रा के अनुसार 34 से 51 पैकेटों की आपूर्ति की जाएगी। (पीटीआई)

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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