
नई दिल्ली, 15 जनवरी (पीटीआई) राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने गुरुवार को कहा कि भारत की संसदीय प्रणाली अपनी शक्ति संवाद, बहस और असहमति की प्राचीन परंपरा से प्राप्त करती है, जो एक सच्चे लोकतंत्र के मूल मूल्य हैं।
यहां पुराने संसद भवन (संविधान सदन) के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (सीएसपीओसी) को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिनिधि और विचार-विमर्श करने वाली संस्थाएं हजारों वर्षों से अस्तित्व में रही हैं और फलती-फूलती रही हैं।
हरिवंश ने कहा कि दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों की उपस्थिति भारत के उस दर्शन को दर्शाती है, जिसमें पूरी दुनिया को एक परिवार माना गया है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन बदलती चुनौतियों पर सामूहिक रूप से विचार करने और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
हरिवंश ने याद दिलाया कि पीठासीन अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे विधायिकाओं की गरिमा बनाए रखें, कार्यवाही में निष्पक्षता सुनिश्चित करें और लोकतांत्रिक मानदंडों की रक्षा करें।
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