
अहमदाबाद, 15 जनवरी (PTI) – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारतीय पहचान को स्थापित किया और यह सुनिश्चित किया कि सनातन धर्म का ध्वज सभी दिशाओं में ऊँचा फहराता रहे।
शाह ने गुजराती में शंकराचार्य की ‘ग्रंथावली’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि 8वीं सदी के अद्वैत वेदांत विद्वान की यह 15 खंडों में प्रकाशित सम्पूर्ण कृतियाँ गुजरात के युवाओं के लिए उपयोगी होंगी और उनके जीवन और कार्य पर प्रभाव डालेंगी।
उन्होंने कहा, “इन ग्रंथों में उस समय के समाज में मौजूद सभी प्रश्नों के समाधान मिल जाएंगे।”
शाह ने शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि इतनी छोटी उम्र में इतना कुछ करना बहुत कम लोगों के बस की बात है। शंकराचार्य पूरे देश में पदयात्रा कर गए और एक तरह से उन्होंने चलती-फिरती विश्वविद्यालय का कार्य किया।
उन्होंने कहा, “उन्होंने केवल पदयात्रा ही नहीं की; उन्होंने भारत की पहचान स्थापित की, चारों दिशाओं में चार मठ बनाए, ज्ञान के केंद्र स्थापित किए और सनातन धर्म का ध्वज चारों दिशाओं में ऊँचा फहराया।”
शाह ने बताया कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठ केवल धार्मिक केंद्र नहीं बने। उनके संरक्षण में उन्होंने वेदों का विभाजन किया और उन्हें संरक्षित करने और प्रचारित करने के लिए स्थायी स्थान प्रदान किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपने जीवनकाल में शंकराचार्य ने बौद्ध, जैन, कपालिक और तांत्रिक परंपराओं सहित विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं के उदय के समय सनातन धर्म को लेकर उठे सवालों और शंकाओं का तार्किक समाधान प्रस्तुत किया।
शाह ने कहा, “आदि शंकराचार्य ने केवल विचार नहीं दिए, बल्कि भारत को विचारों का संश्लेषण भी दिया। उन्होंने ज्ञान प्रदान किया, उसे रूप दिया और मुक्ति का मार्ग भी दिखाया।”
ये खंड सस्तु साहित्य मुद्रालय ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित किए गए हैं और गौतम पटेल द्वारा संपादित किए गए हैं।
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