
पुर, 15 जनवरी (PTI) – सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय सेना भविष्य के लिए तैयार बल के रूप में आगे बढ़ रही है और स्वदेशी उपकरणों की आवश्यकता को एक “रणनीतिक आवश्यकता” करार दिया।
जयपुर में सेना दिवस परेड के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “भारतीय सेना एक भविष्य-तैयार बल के रूप में आगे बढ़ रही है, जिसमें प्रशिक्षित सैनिक, आधुनिक उपकरण और बहु-क्षेत्रीय संचालन क्षमताएँ हैं। तकनीक का उपयोग सैनिकों को और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है।”
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सेना की सोच में स्पष्ट बदलाव आया है।
“हम केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान नहीं कर रहे, बल्कि भविष्य की लड़ाइयों की तैयारी भी कर रहे हैं। इस दिशा में नए ढांचे बनाए जा रहे हैं, जिन्हें भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार सुसज्जित और प्रशिक्षित किया जा रहा है।”
जनरल द्विवेदी ने बताया कि भैरव बटालियन और शक्ति बाण रेजिमेंट जैसी नई इकाइयाँ स्थापित की गई हैं।
“यह दर्शाता है कि सेना अब अधिक चुस्त, उत्तरदायी और मिशन-केंद्रित बन रही है, जो भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल है।”
उन्होंने कहा कि आज की परेड परंपरा और परिवर्तन का सुंदर मिश्रण प्रस्तुत करती है।
“नेपाल आर्मी बैंड हमारे मजबूत संबंधों को दर्शाता है, जबकि नई इकाइयों ने सेना की उभरती ताकत दिखाई।”
सेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय सेना किसी भी प्रकार के हमले के लिए हमेशा पूरी तरह तैयार है और भविष्य की युद्ध स्थितियों के लिए भी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, “सेना समय के साथ खुद को ढालती रहेगी और आवश्यक बदलाव लाएगी।”
उन्होंने ‘मेड इन इंडिया’ उपकरणों के प्रदर्शन को आत्मनिर्भरता की नींव बताया।
“भविष्य में भारतीय सेना को ऐसे उपकरणों की आवश्यकता होगी जो भारत में डिज़ाइन और विकसित किए गए हों। स्वदेशीकरण केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि अब एक रणनीतिक आवश्यकता बन गया है।”
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऐसे संसाधनों पर विशेष जोर दिया जा रहा है जो सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोगी हों, जिससे देश के समग्र विकास में योगदान मिले।
परेड जयपुर में आयोजित करने के बारे में उन्होंने कहा कि राजस्थान वह भूमि है जहाँ कई नायक इतिहास रच चुके हैं, इसलिए इसे चुना गया।
उन्होंने रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी युद्ध की अवधि पहले से नहीं बताई जा सकती और भविष्य के संघर्ष कुछ दिनों या वर्षों तक चल सकते हैं।
सेना प्रमुख ने देश में अनुसंधान और विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “लंबी लड़ाई लड़ने और पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए उपकरण और आपूर्ति देश में ही निर्मित और मरम्मत किए जाने चाहिए। अनुसंधान और विकास बहुत महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने कहा, “इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर आगे बढ़ने के रास्तों पर विचार कर रही है।”
जनरल द्विवेदी ने सूचना युद्ध में विश्वसनीयता की आवश्यकता पर भी बल दिया।
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