पणजी, 15 जनवरी (पीटीआई) गोवा सरकार ने विधानसभा को जानकारी दी है कि पिछले नौ महीनों में महादेई नदी जल विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में किसी विशेष तारीख पर सुनवाई के लिए कोई अलग आवेदन दाखिल नहीं किया गया। यह मामला वर्तमान में भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लंबित है।
विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान विधायक एलेक्सियो लोरेंको के प्रश्न का उत्तर देते हुए जल संसाधन मंत्री सुभाष शिरोडकर ने कहा कि मामलों की सूचीकरण, सुनवाई की तारीख तय करना और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी तरह भारत के मुख्य न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में आता है।
उन्होंने बताया कि 13 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने महादेई मामले को निर्देशों के लिए 20 जनवरी 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में दोबारा सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में तारीख तय होने के बावजूद अन्य मामलों की सुनवाई के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी।
मंत्री ने कहा कि मई 2025 में न्यायमूर्ति बी.आर. गवई के भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद भी यह मामला नहीं सुना जा सका, क्योंकि वह महाराष्ट्र से हैं, जो इस विवाद का एक पक्ष है।
एक अन्य सवाल के जवाब में शिरोडकर ने बताया कि गोवा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केंद्र से यह निर्देश देने की मांग की थी कि कर्नाटक को महादेई बेसिन से मालप्रभा बेसिन में 7.56 टीएमसी पानी के डायवर्जन के लिए दी गई सैद्धांतिक मंजूरी वापस ली जाए और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया जाए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान केंद्र सरकार ने नवंबर 2010 में ‘महादेई जल विवाद न्यायाधिकरण’ के गठन को मंजूरी दी, जिसके बाद जनवरी 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने गोवा की मूल याचिका का निपटारा करते हुए सभी मुद्दे न्यायाधिकरण के समक्ष उठाने की छूट दी।
इसके बाद गोवा ने वर्ष 2018 में जल विवाद न्यायाधिकरण के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। कर्नाटक और महाराष्ट्र सरकारों ने भी इस मामले में शीर्ष अदालत का रुख किया है।
उल्लेखनीय है कि गोवा और कर्नाटक के बीच महादेई नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। भाजपा शासित गोवा ने कांग्रेस शासित कर्नाटक पर दो बांध बनाकर नदी का पानी मोड़ने की योजना बनाने का आरोप लगाया है।
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