
जोहान्सबर्ग, 16 जनवरी (एपी) दक्षिणी अफ्रीका के कई देशों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के कारण 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को चेतावनी दी कि क्षेत्र के कई हिस्सों में और भी गंभीर मौसम की आशंका है।
दक्षिण अफ्रीका में पिछले महीने शुरू हुई भारी बारिश के बाद आई भीषण बाढ़ से उसके उत्तरी प्रांतों में कम से कम 19 लोगों की मौत की सूचना है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रीय उद्यान प्राधिकरण के अनुसार, इस सप्ताह प्रसिद्ध क्रूगर नेशनल पार्क के बाढ़ग्रस्त शिविरों से पर्यटकों और कर्मचारियों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। पार्क के कई हिस्सों में सड़कें और पुल बह जाने के कारण पहुंच संभव नहीं है, इसलिए इसे पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।
पड़ोसी देश मोज़ाम्बिक में आपदा प्रबंधन और जोखिम न्यूनीकरण संस्थान ने बताया कि पिछले वर्ष के अंत से शुरू हुए असामान्य रूप से भीषण बारिश के मौसम में 103 लोगों की मौत हो चुकी है। संस्थान के अनुसार, मौतें बिजली गिरने से करंट लगने, बाढ़ में डूबने, खराब मौसम से ढांचे ढहने और हैजा जैसी बीमारियों के कारण हुई हैं।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के अनुसार, मोज़ाम्बिक के मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बाढ़ आई है, जहां 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, हजारों घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और दसियों हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जरूरत पड़ सकती है।
जिम्बाब्वे की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने बताया कि इस वर्ष की शुरुआत से भारी बारिश के कारण 70 लोगों की मौत हो चुकी है और 1,000 से अधिक घर नष्ट हो गए हैं। इसके अलावा स्कूलों, सड़कों और पुलों सहित बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
अफ्रीका के तट से दूर स्थित द्वीपीय देश मेडागास्कर के साथ-साथ मलावी और जाम्बिया में भी बाढ़ का असर देखा गया है। मेडागास्कर के अधिकारियों ने बताया कि पिछले नवंबर के अंत से अब तक बाढ़ से 11 लोगों की मौत हुई है।
अमेरिका की ‘फेमिन अर्ली वार्निंग सिस्टम’ ने कहा कि दक्षिणी अफ्रीका के कम से कम सात देशों में बाढ़ की सूचना मिली है या इसकी आशंका है। यह संभवतः ‘ला नीना’ मौसम प्रणाली की मौजूदगी के कारण हो सकता है, जो दक्षिण-पूर्वी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में भारी बारिश लाती है।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने गुरुवार को उत्तरी लिम्पोपो प्रांत के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और बताया कि उस क्षेत्र में एक सप्ताह से भी कम समय में लगभग 400 मिलीमीटर बारिश हुई है। उन्होंने कहा, “जिस जिले का मैंने दौरा किया, वहां 36 घर पूरी तरह से धरती से मिट गए हैं। सब कुछ खत्म हो गया है—छतें, दीवारें, बाड़, सब कुछ।”
यह बाढ़ उत्तरी लिम्पोपो और म्पुमालांगा प्रांतों में आई है। दक्षिण अफ्रीकी मौसम सेवा ने शुक्रवार के लिए देश के कुछ हिस्सों में रेड-लेवल 10 अलर्ट जारी किया है, जिसमें और भारी बारिश और जान-माल के लिए खतरा पैदा करने वाली बाढ़ की चेतावनी दी गई है, जिससे बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है।
लगभग 22,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला विशाल क्रूगर वन्यजीव उद्यान भी भीषण बाढ़ से प्रभावित हुआ है। क्रूगर नेशनल पार्क के प्रवक्ता रेनॉल्ड थाखुली ने बताया कि पार्क के भीतर स्थित शिविरों से करीब 600 पर्यटकों और कर्मचारियों को ऊंचे इलाकों में पहुंचाया गया है।
उन्होंने तुरंत यह नहीं बताया कि पार्क में कुल कितने लोग थे। कई नदियों के उफान पर आने से शिविर, रेस्तरां और अन्य क्षेत्र जलमग्न हो गए, जिसके बाद पार्क को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया। उद्यान प्राधिकरण ने कहा कि एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं और क्रूगर में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है।
दक्षिण अफ्रीकी सेना ने उत्तरी क्षेत्रों में घरों की छतों या पेड़ों पर फंसे लोगों को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर भेजे। सेना के एक हेलीकॉप्टर ने दक्षिण अफ्रीका-जिम्बाब्वे सीमा पर स्थित बाढ़ग्रस्त चेकपोस्ट पर फंसे सीमा अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भी बचाया।
हाल के वर्षों में दक्षिणी अफ्रीका में कई चरम मौसम घटनाएं देखी गई हैं, जिनमें विनाशकारी चक्रवात और भीषण सूखा शामिल है, जिससे उस क्षेत्र में खाद्य संकट पैदा हुआ, जो पहले से ही अक्सर भोजन की कमी से जूझता रहता है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम ने बताया कि मौजूदा बाढ़ के कारण मोज़ाम्बिक में 70,000 हेक्टेयर (लगभग 1,73,000 एकड़) से अधिक फसलें, जिनमें चावल और मक्का जैसी प्रमुख फसलें शामिल हैं, जलमग्न हो गई हैं। इससे हजारों छोटे किसानों की खाद्य सुरक्षा और अधिक बिगड़ गई है, जो अपनी आजीविका और भोजन के लिए इन्हीं फसलों पर निर्भर हैं।
(एपी)
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