ताइवान के पत्रकार पर चीन को जानकारी लीक कराने के लिए सैन्य अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप

Arrested (Representative Image)

ताइपे, 18 जनवरी (एपी) ताइवान में एक पत्रकार को शनिवार को इस आरोप में हिरासत में लिया गया कि उसने मुख्यभूमि चीन के लोगों को सैन्य जानकारी उपलब्ध कराने के बदले सेना के अधिकारियों को रिश्वत दी। आत्म-शासित इस द्वीप पर चीन की संभावित घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई तेज की जा रही है।

ताइवान के कियाओतोउ जिला अभियोजक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि जिला अदालत ने ‘लिन’ उपनाम वाले एक टीवी रिपोर्टर और वर्तमान व सेवानिवृत्त पांच सैन्य अधिकारियों की हिरासत का आदेश दिया है। बयान में पत्रकार की पहचान स्पष्ट नहीं की गई, लेकिन सीटीआई टीवी ने अपने रिपोर्टर लिन चेन-यू की हिरासत की पुष्टि करते हुए एक बयान जारी किया।

कंपनी ने कहा कि उसे मामले के विवरण की जानकारी नहीं है, लेकिन निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया की मांग की और कहा, “भगवान ताइवान की रक्षा करे।” ताइवान में सरकार और सेना के भीतर जासूसी के मामलों की जांच आम है, लेकिन पत्रकारों के खिलाफ ऐसे आरोप असामान्य माने जाते हैं।

बीजिंग, जो ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग से नियंत्रण करने की धमकी देता रहा है, हाल के समय में द्वीप पर सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। पिछले महीने वाशिंगटन द्वारा ताइवान को बड़े पैमाने पर हथियार बिक्री की घोषणा के बाद चीन की सेना ने दो दिनों तक ताइवान के आसपास बड़े सैन्य अभ्यास किए थे।

अभियोजकों का आरोप है कि लिन ने वर्तमान सैन्य अधिकारियों को “चीनी व्यक्तियों” को जानकारी देने के बदले कई हजार से लेकर दसियों हजार ताइवान डॉलर (दसियों से सैकड़ों अमेरिकी डॉलर) तक की रकम दी। कार्यालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये चीनी व्यक्ति कौन थे या उनका संबंध चीनी सरकार से था या नहीं।

अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, भ्रष्टाचार कानूनों के उल्लंघन और गोपनीय जानकारी के खुलासे की जांच के तहत शुक्रवार को रिपोर्टर और नौ वर्तमान व सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के ठिकानों पर छापेमारी की। सीटीआई ने कहा कि उसके कार्यालयों पर छापा नहीं पड़ा।

लिन के फेसबुक पेज के अनुसार, वह एक राजनीतिक रिपोर्टर और एंकर थे, जो द्वीप की विधायिका को कवर करते थे।

चीन और ताइवान 1949 से अलग-अलग शासित हैं, जब गृहयुद्ध के बाद कम्युनिस्ट पार्टी बीजिंग में सत्ता में आई। पराजित राष्ट्रवादी पार्टी की सेनाएं ताइवान भाग गईं, जिसने बाद में मार्शल लॉ से बहुदलीय लोकतंत्र की ओर संक्रमण किया।