महाराष्ट्र में सहयोगी दलों को हाशिये पर डालने की भाजपा की रणनीति सामने आ रही है: सिब्बल

**EDS: THIRD PARTY IMAGE, SCREENGRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: MP Kapil Sibal speaks in the Rajya Sabha during the Winter session of Parliament, in New Delhi, Monday, Dec. 15, 2025. (PTI Photo)(PTI12_15_2025_000513B)

नई दिल्ली, 18 जनवरी (पीटीआई) राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि जिन राज्यों में भाजपा सत्ता में नहीं है या बहुमत में नहीं है, वहां उसकी राजनीतिक रणनीति पहले अन्य दलों से गठबंधन करना, सत्ता में आना और फिर उन्हें हाशिये पर डालना रही है।

उन्होंने कहा कि यह रणनीति बिहार में सफल रही और अब महाराष्ट्र में भी लागू होती दिखाई दे रही है।

सिब्बल ने कहा कि महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में विपक्षी और छोटे दलों के लिए संदेश साफ है कि यदि वे भाजपा के साथ जाते हैं तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाएगा।

एक्स पर पोस्ट करते हुए सिब्बल ने कहा, “भाजपा की राजनीतिक रणनीति: जिन राज्यों में वे सत्ता में नहीं हैं या बहुमत में नहीं हैं, वहां अन्य राजनीतिक दलों से गठबंधन करना, सत्ता में आना और फिर उन्हें हाशिये पर डाल देना।”

उन्होंने लिखा, “यह रणनीति बिहार में सफल रही है। महाराष्ट्र में इसे लागू किया जा रहा है!”

बाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सिब्बल ने कहा कि महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों ने राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की राजनीति के लिए भी कई संदेश दिए हैं।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं लोगों को बताना चाहता हूं कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का वार्षिक बजट 74,000 करोड़ रुपये है और इसलिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले नगर निकाय चुनावों में शिवसेना, जो उस समय एकजुट थी, ने जीत हासिल की थी और बीएमसी की सत्ता में थी।” उन्होंने कहा कि अब शिवसेना के शिंदे गुट का इस पर नियंत्रण नहीं रहा।

सिब्बल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, “2012 में भाजपा को सिर्फ 31 सीटें मिली थीं। 2017 में 82 और इस बार 89 सीटें मिली हैं। शिवसेना को 2012 में 74, 2017 में 84 और अब 29 सीटें मिलीं। कांग्रेस को 2012 में 52, 2017 में 31 और अब 24 सीटें मिलीं। एनसीपी को 2012 में 13, 2017 में 9 और अब सिर्फ 3 सीटें मिली हैं। एमएनएस को 2012 में 28, 2017 में 7 और अब 6 सीटें मिली हैं। भाजपा को छोड़कर सभी दलों का ग्राफ नीचे गया है।”

उन्होंने कहा कि यह भाजपा की चुनावी रणनीति रही है। “जहां उन्हें लगता है कि वे कमजोर हैं, वहां वे किसी छोटे दल से गठबंधन करते हैं, सत्ता में आते हैं और फिर उसे हाशिये पर डाल देते हैं,” सिब्बल ने कहा। उन्होंने हरियाणा में लोकदल और बिहार में जद(यू) का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन करने वाले दलों के लिए इसमें एक स्पष्ट संदेश है।

सिब्बल ने कहा, “देखिए अजित पवार के साथ क्या हुआ। अब शिंदे भी विजेता पार्षदों को होटल में लेकर गए हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि भाजपा नेताओं को खरीदती है और तोड़ती है।”

उन्होंने दावा किया कि इन चुनावों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शिवसेना उद्धव ठाकरे की है, न कि एकनाथ शिंदे की।

राज्यसभा सांसद ने कहा कि देश की राजनीति अब उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के इर्द-गिर्द बंटी हुई है, जहां उत्तर ध्रुव भाजपा है और दक्षिण ध्रुव कांग्रेस, जबकि कांग्रेस के सत्ता में रहने के समय स्थिति इसके उलट थी।

उन्होंने कहा, “छोटे दलों को तय करना होगा कि वे भाजपा के साथ जाकर हाशिये पर जाना चाहते हैं या उसके खिलाफ लड़ने के लिए विपक्ष के साथ हाथ मिलाना चाहते हैं।”

महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने 2,869 में से 1,425 सीटें जीतकर मुंबई और पुणे सहित एक दर्जन से अधिक नगर निगमों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरते हुए ठाकरे और पवार परिवारों के गढ़ में सेंध लगाई।

अंतिम आंकड़ों के अनुसार, शिवसेना ने 399 सीटें, कांग्रेस ने 324, एनसीपी ने 167, शिवसेना (यूबीटी) ने 155, एनसीपी (एसपी) ने 36, एमएनएस ने 13, बसपा ने 6 सीटें जीतीं। राज्य निर्वाचन आयोग में पंजीकृत दलों को 129 सीटें, गैर-मान्यता प्राप्त दलों को 196 सीटें और 19 निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।

ये चुनाव मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, नवी मुंबई, वसई-विरार, कल्याण-डोंबिवली, कोल्हापुर, नागपुर, सोलापुर, अमरावती, अकोला, नासिक, पिंपरी-चिंचवड़, पुणे, उल्हासनगर, ठाणे, चंद्रपुर, परभणी, मीरा-भायंदर, नांदेड़-वाघाला, पनवेल, भिवंडी-निजामपुर, लातूर, मालेगांव, सांगली-मिराज-कुपवाड़, जलगांव, अहिल्यानगर, धुले, जालना और इचलकरंजी नगर निगमों में हुए।

पीटीआई ASK RUK RUK