भारत ने कभी अच्छी शुरुआत नहीं की, युवाओं को कोहली की सोच अपनानी चाहिए: गावस्कर

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Gavaskar, watching from the commentary box, called MI performance “absolutely terrible cricket.” [Image - MoneyControl}

नई दिल्ली, 19 जनवरी (पीटीआई) पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने कहा कि भारत की खराब शुरुआत ही न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज हारने की बड़ी वजह बनी। उन्होंने कहा कि टीम के बल्लेबाजों को यह समझने के लिए विराट कोहली से सीख लेनी चाहिए कि मुश्किल लक्ष्य का पीछा करते समय पारी को कैसे संभालकर आगे बढ़ाया जाता है।

भारत को इंदौर में खेले गए तीसरे और अंतिम वनडे में न्यूजीलैंड के हाथों 41 रन से हार का सामना करना पड़ा, जिसके साथ ही भारत ने पहली बार अपने घर में न्यूजीलैंड के खिलाफ 50 ओवर की सीरीज गंवाई। यह हालिया निराशाजनक नतीजों की कड़ी को आगे बढ़ाता है। विराट कोहली ने 108 गेंदों पर 124 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन 338 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्हें कोई ठोस साझेदार नहीं मिल सका।

‘जियोस्टार’ पर ‘अमूल क्रिकेट लाइव’ कार्यक्रम में गावस्कर ने कहा,

“जब तक विराट कोहली को पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, तब तक जीत मुश्किल ही थी, और उन्हें बहुत कम समर्थन मिला। पूरी सीरीज में भारत की असली समस्या शुरुआत रही। जैसा कहा जाता है, अच्छी शुरुआत आधा काम कर देती है।”

उन्होंने कहा,

“भारत कभी अच्छी शुरुआत नहीं कर पाया और यही एक बड़ा कारण रहा कि टीम इतने बड़े स्कोर का पीछा नहीं कर सकी।”

भारत ने 159 रन पर आधी टीम गंवा दी थी, जिससे जीत की उम्मीदों को गहरा झटका लगा।

गावस्कर ने आगे कहा,

“…जब आप केएल राहुल जैसे फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज को गंवा देते हैं और उसके बाद नितीश कुमार रेड्डी आते हैं, जिन्होंने इस 53 रन की पारी से पहले अपनी क्षमता के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया था, और फिर हर्षित राणा आते हैं, जिनसे क्या मिलेगा यह कभी तय नहीं होता, तो स्थिति और मुश्किल हो जाती है। भारत के साथ यही हुआ।”

दिग्गज पूर्व बल्लेबाज ने अंत तक संघर्ष करने के लिए विराट कोहली की सराहना की और अन्य खिलाड़ियों से उनकी सोच और निरंतरता अपनाने की अपील की।

उन्होंने कहा,

“विराट की खास बात यह है कि वह किसी छवि से बंधे नहीं रहते। बहुत से बल्लेबाज और गेंदबाज इस बात से बंध जाते हैं कि लोग उन्हें किस तरह देखते हैं और उसी छवि पर खरा उतरने की कोशिश करते हैं। विराट ऐसे नहीं हैं।”

उन्होंने आगे कहा,

“वह काम पर ध्यान देते हैं और वह काम है रन बनाना। कभी इसका मतलब सतर्क शुरुआत करना होता है और फिर खुलकर खेलना, तो कभी शुरू से आक्रामक होना और फिर सिंगल-डबल लेकर पारी को आगे बढ़ाना। वह इस बात से नहीं चलते कि उन्हें कैसा खेलना चाहिए।”

गावस्कर ने कहा,

“यही मानसिकता सबसे अहम है। वह यह नहीं सोचते कि ‘मुझसे छक्का लगाने की उम्मीद है’। वह हालात के मुताबिक खेलते हैं। वह कभी हार नहीं मानते। अंत तक वह कोशिश करते रहे। युवाओं के लिए यही सबसे बड़ा सबक है—किसी छवि के पीछे मत भागो। हालात के मुताबिक खेलो, और तुम खुद को पहले से कहीं ज्यादा लगातार प्रदर्शन करते पाओगे।”

हर्षित राणा की निचले क्रम की अर्धशतकीय पारी पर बात करते हुए, जिसने एक समय जीत की उम्मीद जगाई थी, गावस्कर ने उनकी मानसिक मजबूती की तारीफ की।

उन्होंने कहा,

“हर्षित राणा की पारी बहुत अच्छी थी। उन्होंने बिल्कुल वैसे ही बल्लेबाजी की जैसी एक निचले क्रम के बल्लेबाज को करनी चाहिए—बिना किसी दबाव और बिना किसी अपेक्षा के। मुझे यह बात प्रभावित कर गई कि विराट कोहली जैसे खिलाड़ी के दूसरे छोर पर होने के बावजूद हर्षित अपनी पिछली असफलताओं से विचलित नहीं हुए।”

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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