
नई दिल्ली, 19 जनवरी (पीटीआई) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को अपने पोलिश समकक्ष रादोस्लाव सिकोरस्की से कहा कि पोलैंड को आतंकवाद के प्रति “शून्य सहिष्णुता” दिखानी चाहिए और भारत के पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को “ईंधन” देने में किसी भी तरह से मदद नहीं करनी चाहिए। यह सख्त संदेश अक्टूबर में जारी पोलैंड-पाकिस्तान संयुक्त बयान में कश्मीर का उल्लेख किए जाने की पृष्ठभूमि में माना जा रहा है।
नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत को निशाना बनाए जाने पर भी नाराजगी जताई और इसे “चयनात्मक, अनुचित और अन्यायपूर्ण” बताया। इसे पश्चिमी देशों द्वारा रूस के साथ भारत के ऊर्जा संबंधों पर की जा रही आलोचना की ओर संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विदेश मंत्री ने ये टिप्पणियां बैठक की शुरुआत में दिए गए अपने टेलीविजन संबोधन में कीं। सिकोरस्की पोलैंड के उप प्रधानमंत्री भी हैं।
पोलिश विदेश मंत्री ने कहा कि वह रूस के साथ भारत के संबंधों के संदर्भ में भारत को लेकर किए जा रहे “अन्याय” और “चयनात्मक निशानेबाजी” पर जयशंकर की बात से पूरी तरह सहमत हैं।
सिकोरस्की तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं, जो यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की भारत यात्रा से 10 दिन से भी कम समय पहले हो रही है।
जयशंकर ने कहा, “आप हमारे क्षेत्र से अनजान नहीं हैं और सीमा-पार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती से भली-भांति परिचित हैं।
मुझे उम्मीद है कि इस बैठक में हम आपके हालिया क्षेत्रीय दौरों पर भी चर्चा करेंगे। पोलैंड को आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता दिखानी चाहिए और हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे को बढ़ावा देने में मदद नहीं करनी चाहिए।”
अक्टूबर के अंत में सिकोरस्की ने इस्लामाबाद का दौरा किया था और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से व्यापक बातचीत की थी, जिसके बाद जारी संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दे का उल्लेख किया गया था।
जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “हाल के समय में, पिछले सितंबर न्यूयॉर्क में और इस जनवरी पेरिस में, मैंने यूक्रेन संघर्ष और उसके प्रभावों पर हमारे विचार आपसे स्पष्ट रूप से साझा किए हैं।
ऐसा करते हुए मैंने बार-बार रेखांकित किया है कि भारत को चुनकर निशाना बनाना अनुचित और अन्यायपूर्ण है। आज मैं इसे फिर दोहराता हूं।”
अपने संबोधन में जयशंकर ने भारत-पोलैंड संबंधों में आई मजबूती का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा, “हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया में काफी उथल-पुथल है। अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित दो देशों के रूप में, जिनकी अपनी-अपनी चुनौतियां और अवसर हैं, विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान निश्चित रूप से उपयोगी है।
हमारे द्विपक्षीय संबंधों में भी लगातार प्रगति हुई है, लेकिन इन्हें निरंतर संजोने की जरूरत है।”
जयशंकर ने अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोलैंड यात्रा को याद करते हुए कहा कि इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया गया।
बैठक में दोनों विदेश मंत्रियों ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी तथा डिजिटल नवाचार में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
जयशंकर ने कहा, “पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार लगभग 7 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसमें पिछले एक दशक में करीब 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।”
उन्होंने कहा, “पोलैंड में भारतीय निवेश 3 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे वहां बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बड़ा बाजार और निवेश-अनुकूल नीतियां पोलिश कंपनियों के लिए अपार अवसर प्रदान करती हैं।”
विदेश मंत्री ने “डोब्री महाराजा (अच्छे महाराजा)” का भी उल्लेख किया — यह उपाधि पोलैंड के लोग नवाणनगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा के लिए इस्तेमाल करते हैं, जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सोवियत दमन से भाग रहे 650 से अधिक पोलिश बच्चों को आश्रय, भोजन और शिक्षा प्रदान की थी।
उन्होंने कहा, “डोब्री महाराजा दोनों देशों के बीच लोगों-से-लोगों के रिश्तों का एक प्रिय सेतु बने हुए हैं।”
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