प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य पद के दावे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस, प्रमाण मांगा

Prayagraj: Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand Saraswati addresses the media, a day after police stopped him from proceeding to the Sangam along with a large number of followers during the ongoing Magh Mela 2026, in Prayagraj, Uttar Pradesh, Monday, Jan. 19, 2026. (PTI Photo)(PTI01_19_2026_000170B)

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश), 20 जनवरी (पीटीआई): यहां गंगा में पवित्र स्नान से कथित रूप से “रोके जाने” को लेकर उठे विवाद के बीच मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य की उपाधि का उपयोग किस आधार पर कर रहे हैं।

रविवार को उस समय विवाद शुरू हुआ, जब सरस्वती अपने समर्थकों के साथ मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान के लिए जा रहे थे और पुलिस ने कथित तौर पर उन्हें रोक दिया। इस घटना के बाद सरस्वती ने अपने शिविर के बाहर धरना शुरू कर दिया, भोजन और पानी का त्याग किया और मेला प्रशासन तथा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से माफी की मांग की। उनका विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है।

प्रयागराज मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दयानंद प्रसाद द्वारा सोमवार को जारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक सिविल अपील का भी उल्लेख है, जिसमें शीर्ष अदालत ने आदेश दिया था कि अपील के निस्तारण तक किसी भी धार्मिक नेता को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य अभिषिक्त नहीं किया जा सकता।

नोटिस में कहा गया है कि वर्तमान स्थिति से स्पष्ट है कि ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य किसी को भी अभिषिक्त नहीं किया गया है, इसके बावजूद सरस्वती ने 2025-26 के प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर पर लगे बोर्ड में स्वयं को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य घोषित किया है।

नोटिस में कहा गया, “आपका यह कृत्य/प्रदर्शन माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना को दर्शाता है। इस पत्र की प्राप्ति के 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करें कि आप अपने नाम के साथ शंकराचार्य शब्द का उपयोग किस आधार पर कर रहे हैं।”

नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए सरस्वती के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने दावा किया कि महाराज जी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ही ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य अभिषिक्त किया जा चुका था।

योगीराज ने कहा कि मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर सरस्वती अपने अनुयायियों के साथ पालकी में शांतिपूर्वक संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिस ने उनसे पालकी से उतरकर घाट पर जाने को कहा। उनके अनुसार, जब सरस्वती ने पालकी से उतरने से इनकार किया तो पुलिस ने उनके समर्थकों की पिटाई की, जिसमें करीब 15 लोग घायल हो गए।

उन्होंने कहा कि सभी घायलों का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है और स्वामी जी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराएंगे। योगीराज ने यह भी कहा कि मेला प्रशासन के माफी मांगने और प्रोटोकॉल के अनुसार स्नान की व्यवस्था करने तक स्वामी जी अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।

मेला अधिकारी ऋषिराज ने दावा किया कि सरस्वती और उनके समर्थकों ने बैरिकेड तोड़कर संगम नोज तक पहुंचने की कोशिश की, और भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुख्य स्नान पर्व के दिन किसी भी परिस्थिति में वाहनों की अनुमति नहीं थी और इसके साक्ष्य मौजूद हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि स्वामी जी के आसपास डेरा डाले कई साधु-संतों ने पवित्र स्नान किया और किसी भी संत का अपमान नहीं किया गया। श्रद्धालुओं और कल्पवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसी कारण व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू किया गया।

इस बीच, कांग्रेस ने सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ कथित “दुर्व्यवहार” को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला और इस “शर्मनाक घटना” पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की।

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