
नई दिल्ली, 20 जनवरी (पीटीआई): सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के आदेशों की आलोचना करने को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए कहा कि उन्होंने अदालत की अवमानना की है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे “हर किसी के खिलाफ तरह-तरह की टिप्पणियां” की हैं।
मेनका गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए पीठ ने कहा, “आप कहते हैं कि अदालत को अपनी टिप्पणियों में संयम बरतना चाहिए, लेकिन क्या आपने अपने मुवक्किल से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उन्होंने बिना सोचे-समझे हर किसी के खिलाफ टिप्पणियां की हैं। क्या आपने उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है?”
पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत की उदारता के चलते वह फिलहाल पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं कर रही है।
न्यायमूर्ति मेहता ने रामचंद्रन से यह भी पूछा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए बजटीय आवंटन सुनिश्चित कराने में क्या भूमिका निभाई है।
इस पर रामचंद्रन ने जवाब दिया कि वह आतंकी अजमल कसाब की ओर से भी पेश हो चुके हैं और बजटीय आवंटन नीति से जुड़ा मामला है।
इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने टिप्पणी की, “अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की थी, लेकिन आपकी मुवक्किल ने की है।”
पीठ ने कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराने संबंधी अदालत की टिप्पणी व्यंग्यात्मक नहीं थी, बल्कि सुनवाई के दौरान संवाद के संदर्भ में गंभीर रूप से कही गई थी।
मामले की सुनवाई अभी जारी है।
गौरतलब है कि 13 जनवरी को शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह कुत्तों के काटने की घटनाओं के लिए राज्यों से “भारी मुआवजा” दिलाने पर विचार करेगी और ऐसे मामलों में कुत्तों को खाना खिलाने वालों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा। अदालत ने पिछले पांच वर्षों से आवारा पशुओं से जुड़े नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन न होने पर भी चिंता जताई थी।
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