केंद्र कर्मचारियों के खिलाफ पीसी एक्ट मामलों में राज्य पुलिस को केस दर्ज करने के लिए सीबीआई की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

New Delhi: A view of Supreme Court of India, in New Delhi, Tuesday, Dec. 16, 2025. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI12_16_2025_000045B)

नई दिल्ली, 20 जनवरी (पीटीआई): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों में राज्य पुलिस, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत जांच कर सकती है और आरोपपत्र भी दाखिल कर सकती है। इसके लिए राज्य पुलिस को सीबीआई से किसी प्रकार की पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सोमवार को कहा कि पीसी एक्ट के तहत आने वाले अपराधों की जांच राज्य एजेंसी, केंद्रीय एजेंसी या किसी भी सक्षम पुलिस एजेंसी द्वारा की जा सकती है, जैसा कि अधिनियम की धारा 17 में स्पष्ट है, बशर्ते जांच अधिकारी निर्धारित रैंक का हो।

पीठ ने कहा, “धारा 17 राज्य पुलिस या राज्य की किसी विशेष एजेंसी को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वत, भ्रष्टाचार और कदाचार से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज करने या जांच करने से न तो रोकती है और न ही बाहर करती है।”

अदालत ने यह भी कहा कि सुविधा और कार्य की दोहराव से बचने के लिए केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार मामलों की जांच आमतौर पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाती है, जबकि राज्य सरकार के कर्मचारियों के मामलों की जांच राज्य की विशेष एजेंसी, जैसे एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), करती है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि राज्य पुलिस को ऐसे मामलों में अधिकार नहीं है।

शीर्ष अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पीसी एक्ट के तहत अपराध संज्ञेय (कॉग्निजेबल) होते हैं और इसलिए राज्य पुलिस उन्हें जांच के दायरे में ले सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखते हुए आया, जिसमें एक केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले को रद्द करने से इनकार किया गया था। हाई कोर्ट ने माना था कि राजस्थान एसीबी को पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने का अधिकार है, भले ही आरोपी केंद्र सरकार का कर्मचारी हो।

शीर्ष अदालत ने कहा, “हाई कोर्ट का यह कहना बिल्कुल सही है कि यह दावा करना गलत है कि केवल सीबीआई ही ऐसे मामलों में अभियोजन शुरू कर सकती है।”

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