ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ यूरोप और मध्य पूर्व के देशों को बांट रहा

President Donald Trump speaks during the 56th annual meeting of the World Economic Forum, WEF, in Davos, Switzerland, Wednesday, Jan. 21, 2026. AP/PTI(AP01_21_2026_000366B)

यरुशलम, 21 जनवरी (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर बुधवार को मतभेद सामने आए, क्योंकि इसकी महत्वाकांक्षाएं गाजा से आगे बढ़ गई हैं। कुछ पश्चिमी यूरोपीय देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया, कुछ ने अभी कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया, जबकि मुस्लिम देशों के एक समूह ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई है।

ये घटनाक्रम इस परियोजना के विस्तारित और विभाजनकारी स्वरूप को लेकर यूरोप की चिंताओं को उजागर करते हैं — जिसे कुछ लोग वैश्विक संघर्षों के समाधान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की भूमिका को टक्कर देने वाला कदम मानते हैं। ट्रंप इस सप्ताह स्विट्ज़रलैंड के दावोस में हो रही विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक के दौरान इस बोर्ड को औपचारिक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

नॉर्वे और स्वीडन ने कहा कि वे इस निमंत्रण को स्वीकार नहीं करेंगे, इससे पहले फ्रांस भी इससे इनकार कर चुका है। वहीं मुस्लिम बहुल देशों के एक समूह — मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात — ने एक संयुक्त बयान में कहा कि उनके नेता बोर्ड में शामिल होंगे।

यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि कितने देश इस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि करीब 30 देशों के शामिल होने की उम्मीद है और लगभग 50 देशों को निमंत्रण भेजा गया है। अमेरिका के दो अन्य अधिकारियों ने, जिन्होंने आंतरिक योजनाओं पर गोपनीयता की शर्त पर बात की, कहा कि लगभग 60 देशों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन अब तक केवल 18 ने ही भागीदारी की पुष्टि की है।

गुरुवार को बोर्ड से जुड़े एक कार्यक्रम से पहले ट्रंप ने संभावनाओं को लेकर आशावादी रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि आमंत्रित देशों में से “कुछ को संसदीय मंज़ूरी की ज़रूरत है, लेकिन ज़्यादातर सभी इसमें शामिल होना चाहते हैं।” ट्रंप की अध्यक्षता में इस बोर्ड की परिकल्पना शुरुआत में गाजा युद्धविराम योजना की निगरानी करने वाले विश्व नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में की गई थी। लेकिन बाद में ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं बढ़ती गईं और ट्रंप ने संकेत दिया कि यह बोर्ड अन्य वैश्विक संघर्षों में भी मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है।

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने बोर्ड में शामिल होने पर सहमति दे दी है — जो उनके पहले के रुख से अलग है, जब उनके कार्यालय ने गाजा की निगरानी के लिए गठित एक अन्य समिति की संरचना की आलोचना की थी।

फ्रांस के बाद नॉर्वे और स्वीडन का इनकार

नॉर्वे के राज्य सचिव क्रिस्टोफ़र थोनर ने कहा कि स्कैंडिनेवियाई देश बोर्ड में शामिल नहीं होगा क्योंकि यह “कई ऐसे सवाल खड़े करता है, जिन पर अमेरिका के साथ और संवाद की आवश्यकता है।” स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने दावोस में कहा कि मौजूदा स्वरूप में उनका देश इस बोर्ड से नहीं जुड़ेगा, हालांकि स्वीडन ने औपचारिक जवाब अभी नहीं दिया है, स्वीडिश समाचार एजेंसी टीटी ने बताया।

स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब ने एसटीए समाचार एजेंसी के हवाले से कहा कि “निमंत्रण स्वीकार करने का समय अभी नहीं आया है।” उन्होंने कहा कि मुख्य चिंता यह है कि बोर्ड का जनादेश बहुत व्यापक है और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर रूप से कमजोर कर सकता है।

फ्रांस ने सप्ताह की शुरुआत में ही इस निमंत्रण को ठुकरा दिया था। फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बैरो ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तुत शांति योजना को लागू करने के लिए हां, जिसका हम पूरी तरह समर्थन करते हैं, लेकिन उस तरह के संगठन के गठन के लिए नहीं, जैसा प्रस्तुत किया गया है, जो संयुक्त राष्ट्र की जगह ले।” यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा, कनाडा, रूस, यूक्रेन और चीन ने भी अभी तक ट्रंप के निमंत्रण पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों के कई देश शामिल होने को तैयार

गाजा युद्धविराम के प्रमुख पक्ष — मिस्र और इज़राइल — ने बोर्ड में शामिल होने की बात कही है। इनके अलावा अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अज़रबैजान, बहरीन, बेलारूस, हंगरी, कज़ाख़स्तान, कोसोवो, मोरक्को, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम ने भी शामिल होने की सहमति दी है।

नेतन्याहू का फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले उनके कार्यालय ने गाजा की कार्यकारी समिति की संरचना की आलोचना की थी — जिसमें तुर्की, जो इज़राइल का प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी है, भी शामिल है — और कहा था कि यह इज़राइली सरकार से समन्वय के बिना बनाई गई है और उसकी नीति के “विपरीत” है, हालांकि आपत्तियों को स्पष्ट नहीं किया गया था।

यह कदम अब नेतन्याहू को अपने गठबंधन के कुछ कट्टरपंथी सहयोगियों, जैसे इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच, के साथ टकराव में ला सकता है, जिन्होंने बोर्ड की आलोचना की है और गाजा के भविष्य की जिम्मेदारी इज़राइल द्वारा एकतरफा तौर पर लेने की मांग की है।

बोर्ड को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। मंगलवार को जब एक रिपोर्टर ने ट्रंप से पूछा कि क्या यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की जगह लेगा, तो उन्होंने कहा, “हो सकता है।”